
इंदौर शहर में एयरपोर्ट रोड पर 15 सिंतम्बर को शाम नो-एंट्री में घुसे ट्रक ने बेकाबू होकर सड़क पर तबाही मचा दी। ट्रक ने कई वाहनों को कुचला और तीन लोगों की जान ले ली, जबकि 12 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
जिसने भी यह मंजर अपनी आंखों से देखा, वह सहम गया। चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल था। कई लोग भागते-भागते दूसरों की मदद को आगे आए, लेकिन जलते ट्रक और झुलसते घायलों को बचाने की कोशिश बेहद दर्दनाक रही। इस घटना ने न सिर्फ परिवारों की दुनिया उजाड़ी, बल्कि प्रशासन की लापरवाही को भी उजागर कर दिया।
हाईकोर्ट ने जताई सख्ती
स्वतः संज्ञान से शुरू हुई सुनवाई
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया था। कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया था कि वे 23 सितंबर को वर्चुअली उपस्थित होकर स्पष्ट करें कि नो-एंट्री नियम लागू होने के बावजूद ट्रक शहर में कैसे घुस गया और प्रशासन की निगरानी में यह चूक कैसे हुई।
पुलिस कमिश्नर और DCP से पूछे सवाल
सुनवाई के दौरान इंदौर पुलिस कमिश्नर वर्चुअली कोर्ट में पेश हुए, जबकि DCP ट्रैफिक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। पुलिस कमिश्नर ने लिखित जवाब पेश किया, जिसमें बताया गया कि अब तक क्या कार्रवाई की गई और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे और ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार पर जोर दिया।
CCTV फुटेज पेश करने के आदेश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि शहर के एंट्री प्वाइंट्स और एयरपोर्ट रोड पर हादसे वाली जगह के सभी CCTV फुटेज अगली सुनवाई तक कोर्ट में पेश किए जाएं। इससे यह साफ हो सकेगा कि आखिर किस लापरवाही के चलते ट्रक नो-एंट्री क्षेत्र में घुस गया और वहां पुलिस की मौजूदगी क्या थी।
हादसे के बाद उठे सवाल
ट्रैफिक सिस्टम पर गंभीर आरोप
इस हादसे ने इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था पर सवालों की झड़ी लगा दी है। लोग पूछ रहे हैं कि जब नो-एंट्री का नियम लागू था, तो ट्रक शहर में कैसे दाखिल हो गया? क्या ट्रैफिक पुलिस अपने काम में नाकाम रही या सिस्टम में कहीं ढिलाई बरती जा रही है?
लापरवाही या चूक?
पुलिस कमिश्नर ने अपने जवाब में कहा कि मामले की जांच जारी है और जिनकी भी लापरवाही सामने आएगी, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, आम लोगों का कहना है कि हादसे के बाद आश्वासन देना काफी नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर ट्रैफिक नियमों को सख्ती से लागू करना बेहद जरूरी है।
पीड़ित परिवारों का दर्द
हादसे में जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, वे गहरे सदमे में हैं। कई घायल अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही ने उनकी दुनिया उजाड़ दी है और दोषियों को सख्त सजा मिलनी ही चाहिए।
अगली सुनवाई और जनता की उम्मीदें
हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस मामले की अगली सुनवाई 10 अक्टूबर को होगी। तब तक राज्य सरकार और पुलिस को CCTV फुटेज और विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करनी होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल जवाब देना काफी नहीं है, बल्कि ठोस कदम उठाना जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इंदौर शहर लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव से जूझ रहा है और ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना ही स्थायी समाधान है। अब पूरे शहर की निगाहें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

