खेतों से बदल रही एमपी की पहचान, सोयाबीन के बाद अब फल और मसालों में भी बना देश का अग्रणी राज्य

अब मध्यप्रदेश सिर्फ सोयाबीन के लिए नहीं जाना जाता। संतरा, लहसुन, धनिया, अदरक और मसालों के उत्पादन में भी प्रदेश देश में पहले नंबर पर पहुंच गया है। यही वजह है कि आज एमपी को भारत का नया फूड बास्केट कहा जा रहा है।
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मध्यप्रदेश लंबे समय से देश में सोयाबीन उत्पादन के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। खेती और बागवानी के क्षेत्र में तेजी से हो रही प्रगति ने मध्यप्रदेश को एक नई पहचान दे दी है। आज यह राज्य केवल सोया स्टेट नहीं रहा, बल्कि पूरे देश की रसोई का स्वाद तय करने वाला फूड बास्केट बनता जा रहा है।

प्रदेश के खेतों से अब सिर्फ सोयाबीन ही नहीं बल्कि संतरा, लहसुन, धनिया, अदरक और कई तरह के मसाले भी बड़ी मात्रा में देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच रहे हैं। यही कारण है कि कृषि विशेषज्ञ और नीति निर्माता अब मध्यप्रदेश को देश का नया फूड बास्केट कहने लगे हैं। किसानों की मेहनत और बेहतर खेती तकनीकों ने इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई है।

मध्यप्रदेश बना देश का नया फूड बास्केट

कृषि उत्पादन के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ दिखाई देता है कि मध्यप्रदेश ने खेती और बागवानी दोनों क्षेत्रों में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। लंबे समय तक सोयाबीन उत्पादन में अग्रणी रहने के बाद अब प्रदेश ने कई अन्य फसलों में भी देश में पहला स्थान हासिल किया है।

संतरा, लहसुन, अदरक और धनिया जैसे मसालों के उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में नंबर-1 पर पहुंच चुका है। इन फसलों की खेती प्रदेश के कई जिलों में बड़े पैमाने पर की जा रही है। इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ रही है बल्कि देश की खाद्य आपूर्ति में भी मध्यप्रदेश की भूमिका मजबूत हो रही है।

मध्यप्रदेश का यह बढ़ता कृषि उत्पादन ही उसे धीरे-धीरे देश का फूड बास्केट बना रहा है। देश के कई राज्यों में इस्तेमाल होने वाले मसाले और सब्जियां अब बड़ी मात्रा में मध्यप्रदेश से भेजे जा रहे हैं।

मसालों और फलों में भी एमपी का दबदबा

अगर मसालों और फलों के उत्पादन की बात करें तो मध्यप्रदेश का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा है। धनिया, लहसुन और अदरक जैसी फसलों में प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया है। इन मसालों की खेती प्रदेश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर होती है।

इसके साथ ही संतरे के उत्पादन में भी मध्यप्रदेश का नाम देश में सबसे ऊपर आता है। प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में संतरे की खेती इतनी बड़ी मात्रा में होती है कि वहां से देश के अलग-अलग राज्यों में संतरे भेजे जाते हैं।

मिर्च और अमरूद जैसी फसलों में भी मध्यप्रदेश ने अपनी मजबूत स्थिति बनाई है। इन फसलों के उत्पादन में प्रदेश देश के टॉप राज्यों में शामिल हो चुका है। इससे यह साफ होता है कि एमपी अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि विविध फसलों की खेती में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

सब्जियों के उत्पादन में भी मजबूत हुआ मध्यप्रदेश

फलों और मसालों के साथ-साथ सब्जियों के उत्पादन में भी मध्यप्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मटर और प्याज जैसी रोजमर्रा की जरूरत की सब्जियों के उत्पादन में प्रदेश अब देश में दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है।

प्याज और मटर का उत्पादन बढ़ने से न केवल किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है बल्कि बाजार में इनकी उपलब्धता भी बेहतर हुई है। प्रदेश के कई किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों की खेती की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।

खेती में आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल और सरकारी योजनाओं के कारण किसानों को बेहतर बीज, सिंचाई सुविधा और बाजार तक पहुंच मिल रही है। यही वजह है कि मध्यप्रदेश का कृषि उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।

फूल और औषधीय पौधों का भी बड़ा केंद्र बन रहा एमपी

मध्यप्रदेश केवल खाद्यान्न और सब्जियों तक सीमित नहीं है। अब यह फूलों और औषधीय पौधों की खेती का भी बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। प्रदेश में कई किसान फूलों की खेती और औषधीय पौधों के उत्पादन की ओर भी बढ़ रहे हैं।

फूल, औषधीय और खुशबूदार पौधों के उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। यह क्षेत्र किसानों के लिए नई संभावनाएं लेकर आया है क्योंकि इन फसलों की बाजार में अच्छी मांग रहती है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अगर किसानों को बेहतर बाजार और तकनीकी सहायता मिलती रही तो मध्यप्रदेश फूलों और औषधीय पौधों के उत्पादन में भी देश के शीर्ष राज्यों में शामिल हो सकता है।

किसानों की मेहनत से बदली एमपी की पहचान

मध्यप्रदेश को देश का नया फूड बास्केट बनाने में सबसे बड़ी भूमिका किसानों की मेहनत की है। प्रदेश के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नई फसलों और आधुनिक तकनीकों को अपना रहे हैं।

बेहतर सिंचाई व्यवस्था, उन्नत बीज और सरकारी योजनाओं के कारण किसानों को खेती में पहले से ज्यादा फायदा मिलने लगा है। यही वजह है कि प्रदेश का कृषि क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है।

किसानों की इस मेहनत का ही नतीजा है कि आज मध्यप्रदेश देश की खाद्य आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। देश के कई राज्यों की रसोई में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें अब सीधे मध्यप्रदेश के खेतों से पहुंच रही हैं।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। तथ्यों की पड़ताल, महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना और निष्पक्ष खबरों के जरिए लोगों की आवाज़ बनना मेरी पत्रकारिता की पहचान है। View all posts by Bhawna Choubey →
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