बड़ी खबर : दिल्ली में इजरायली दूतावास के पास ब्‍लास्‍ट, गाड़ियों के शीशे टूटे

बड़ी खबर : दिल्ली में इजरायली दूतावास के पास ब्‍लास्‍ट, गाड़ियों के शीशे टूटे

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट| बड़ी खबर देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) से है| जहां इजरायल दूतावास (Embassy of Israel) के पास ब्‍लास्‍ट हुआ है। इसमें गाडि़यों के शीशे टूटे हैं। विस्‍फोट स्‍थल विजय चौक से करीब डेढ़ किमी की दूरी पर है जहां इस समय बीटिंग रिट्रीट समारोह (Beating the Retreat) के चलते राष्‍ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्‍ट्रपति मौजूद हैं|

जानकारी के मुताबिक राजधानी दिल्ली में स्थित इजरायली दूतावास (Embassy of Israel) के पास ये धमाका हुआ है| धमाके में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है| बताया जा रहा है धमाके के कारण मौके पर स्थित 4-5 गाड़ियां क्षतिग्रस हुई हैं| गाड़ियों के शीशे टूटे हैं| दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ब्लास्ट की जांच शुरू कर दी है। मौके पर बम निरोधक दस्ता भी भेजा गया। मौके भारी पुलिस बल तैनात किया गया है|

बता दें कि विजय चौक पर इस समय बीटिंग द रीट्रीट चल रहा है, इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीसमेत कई गणमान्य लोग मौदूद हैं| मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, धमाके के बाद पुलिस इंटेलिजेंस के तमाम बड़े अधिकारी मौके पर पहुँच गए हैं| बताया जा रहा है धमाका शाम 5 बजे के आसपास हुआ| पुलिस का कहना है कि धमाके की आवाज सुनाई दी हालांकि ये IED धमाका है या कुछ और इसकी जांच की जा रही है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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