दिल्ली-NCR डॉग शेल्टर विवाद, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गरमाया मुद्दा, CJI बोले – “मैं देखता हूं”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर कोई इस आदेश में बाधा डालता है, तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा। कोर्ट ने सभी नगर निगमों को छह हफ्तों के भीतर अपनी कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट जमा करने को कहा।
CJI बीआर गवई

CJI बीआर गवई

दिल्ली-NCR में आवारा कुत्तों को शेल्टर होम भेजने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। 11 अगस्त 2025 को कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को तत्काल प्रभाव से डॉग शेल्टर में भेजने का निर्देश दिया। इस फैसले के पीछे कोर्ट ने कुत्तों के काटने से बढ़ते रेबीज मामलों और मौतों पर चिंता जताई। जस्टिस जेबी पारडीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा था- “क्या डॉग लवर्स उन लोगों को वापस ला सकते हैं, जिनकी रेबीज की वजह से मौत हो गई?” कोर्ट ने कहा कि कुत्तों को पकड़े जाने के बाद स्टरलाइज और इम्यूनाइज कर शेल्टर भेजा जाए और किसी भी हालत में उन्हें वापस सड़कों पर न छोड़ा जाए।

एक्टिविस्ट्स का विरोध और पुराना आदेश

कोर्ट के इस आदेश का एनिमल एक्टिविस्ट और कुछ वकीलों ने कड़ा विरोध किया। 13 अगस्त को एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा कि कोर्ट का ही एक पुराना आदेश है, जिसमें कहा गया था कि “सभी जीवों के प्रति करुणा होनी चाहिए” और किसी भी परिस्थिति में कुत्तों की अंधाधुंध हत्या नहीं की जा सकती। उन्होंने दलील दी कि ये सामुदायिक कुत्ते हैं और इनका अस्तित्व खत्म नहीं किया जाना चाहिए। वकील ने यह भी कहा कि वह और उनके जैसे लोग कुत्तों को गोद लेकर अपने घर में रखने के लिए तैयार हैं। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की -“आवारा कुत्ता रातों-रात पालतू नहीं बन जाएगा।”

CJI गवई की प्रतिक्रिया

मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई (CJI BR Gavai) ने वकील की दलीलें सुनने के बाद कहा – “बेंच पहले ही फैसला सुना चुकी है, लेकिन मैं इसको देखता हूं।” CJI का यह बयान इस ओर इशारा करता है कि मामले पर पुनर्विचार की संभावना हो सकती है। साथ ही कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर की राज्य सरकारों और नगर निगमों को कुत्ता काटने की घटनाओं के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करने का निर्देश दिया। शिकायत मिलने के चार घंटे के भीतर संबंधित कुत्ते को पकड़कर उसका इलाज और वैक्सीनेशन कराने के बाद शेल्टर भेजने का आदेश दिया गया।

सख्त चेतावनी और रिपोर्ट की मांग

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर कोई इस आदेश में बाधा डालता है, तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा। कोर्ट ने सभी नगर निगमों को छह हफ्तों के भीतर अपनी कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट जमा करने को कहा। इस पूरे मामले ने एक बड़ा सामाजिक और कानूनी बहस का रूप ले लिया है- एक ओर रेबीज और सुरक्षा का मुद्दा है, तो दूसरी ओर जानवरों के अधिकार और उनके प्रति करुणा की भावना का सवाल है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोर्ट अपने आदेश में कोई बदलाव करता है या नहीं।

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