CJI सूर्यकांत ने न्यायपालिका में महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर दिया जोर, कहा- हाईकोर्ट कॉलेजियम काबिल महिला वकीलों को जज बनाना नियम समझे, अपवाद नहीं

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने रविवार को एक कार्यक्रम में न्यायपालिका में ज्यादा महिलाओं को लाने के लिए संस्थागत सुधारों की जोरदार वकालत की। उन्होंने हाईकोर्ट कॉलेजियम से आग्रह किया कि वे योग्य महिला वकीलों की नियुक्ति को एक सामान्य नियम बनाएं, न कि कोई अपवाद समझें।
CJI Suryakant

फाइल फोटो

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने रविवार को कहा कि न्यायिक व्यवस्था में सार्थक प्रगति के लिए इसे संस्थागत बनाना होगा, ताकि योग्य महिला वकीलों को बेंच तक पहुंचने का रास्ता साफ हो सके। CJI ने जोर देकर कहा कि हाईकोर्ट कॉलेजियम को प्रतिभाशाली महिला सदस्यों को जज बनाने पर एक नियम के तौर पर विचार करना चाहिए, न कि किसी अपवाद के रूप में।

वह ‘इंडियन वीमेन इन लॉ’ के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे, जिसका विषय था “हाफ द नेशन हाफ द बेंच ब्रिज द गैप बैलेंस द बेंच।” इस कार्यक्रम में महिला वकीलों और न्यायपालिका के सदस्यों ने उनके विचारों का तालियों से स्वागत किया।

‘महिलाएं रियायत नहीं, सही प्रतिनिधित्व मांग रही हैं’

CJI सूर्यकांत ने इस बात पर जोर दिया कि बार के सदस्यों को एक सीधी सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा, “महिला सदस्य कोई रियायत नहीं मांग रही हैं। वे सही और उचित प्रतिनिधित्व चाहती हैं, जिसकी बहुत पहले से जरूरत थी। जब प्रोफेशन खुद इस सच्चाई को समझेगा, तभी बेंच तक का रास्ता साफ होगा।”

“जब प्रगति को सार्थक बनाना है, तो इसे संस्थागत बनाना होगा। कहानी यह नहीं होनी चाहिए कि किसी एक व्यक्ति को ज़्यादा प्रतिनिधित्व मिला, बल्कि यह होनी चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट और देश भर के हाईकोर्ट ने जानबूझकर अपने प्रोसेस में निष्पक्षता को शामिल किया।”- CJI सूर्यकांत

उन्होंने आगे कहा कि जब ऐसा होगा, तो प्रतिनिधित्व किसी व्यक्तित्व या इरादे पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि यह संस्थान की संरचना में ही निहित होगा और इसी तरह से लंबे समय तक चलने वाला बदलाव आता है।

हाईकोर्ट कॉलेजियम के लिए स्पष्ट संदेश

मुख्य न्यायाधीश ने हाईकोर्ट कॉलेजियम से सीधे तौर पर आग्रह करते हुए कहा कि विचार-विमर्श कर कार्रवाई करने का समय भविष्य में नहीं, बल्कि अभी है। उन्होंने कहा, “जहां बार की सही, काबिल महिला सदस्य उपलब्ध हैं, उन पर विचार करना कोई अपवाद नहीं होना चाहिए; यह नॉर्म होना चाहिए।”

उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि अगर कुछ हाईकोर्ट या जिलों में एक विशेष आयु वर्ग में सही उम्मीदवार तुरंत उपलब्ध नहीं हैं, तो यह कोई रुकावट नहीं बननी चाहिए। CJI ने कहा, “मैं हाईकोर्ट कॉलेजियम से अनुरोध करता हूं कि वे अपने विचार का दायरा बढ़ाएं और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली उन महिला वकीलों को भी शामिल करें जो उस राज्य से हैं।”

न्यायपालिका में महिलाओं की मौजूदा स्थिति

CJI ने बताया कि जिला न्यायपालिका में स्थिति काफी उत्साहजनक है, जो भविष्य का एक स्पष्ट संकेत है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जिला स्तर पर न्यायिक अधिकारियों की कुल संख्या में लगभग 36.3 प्रतिशत महिलाएं हैं, जिससे नींव लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में 18 महिला जज हैं, जबकि मद्रास और बॉम्बे हाईकोर्ट में भी लगभग एक दर्जन महिला जज कार्यरत हैं।

इस कार्यक्रम में पूर्व CJI एनवी रमना और सुप्रीम कोर्ट के अन्य मौजूदा न्यायाधीश, जिनमें जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान शामिल थे, भी मौजूद थे। कार्यक्रम का स्वागत ‘इंडियन वीमेन इन लॉ’ संगठन से जुड़ीं वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता और महालक्ष्मी पावनी ने किया।

Banshika Sharma
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मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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