16 लाख कर्मचारियों-पेंशनर्स को CM का तोहफा, महंगाई भत्ता बढ़ा, आदेश जारी, बढ़ेगी सैलरी-पेंशन

केंद्र के बाद अब तमिलनाडु सरकार ने अपने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते को 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया है। नई दरें जनवरी 2026 से लागू होंगी। ​
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तमिलनाडु के सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और शिक्षकों के लिए खुशखबरी है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (C. Joseph Vijay) के नेतृत्व वाली सरकार ने कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) में 2% की वृद्धि की है। इस बढ़ोतरी के बाद डीए/डीआर की दर 58% से बढ़कर 60% हो गई है।

नई दरें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी, ऐसे में जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल का एरियर भी मिलेगा। इस फैसले से प्रदेश के करीब 16 लाख कर्मचारी व पेंशनभोगी लाभान्वित होंगे। राज्य के खजाने पर प्रति वर्ष लगभग ₹1,230 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

इससे पहले तमिलनाडु सरकार ने नवंबर 2025 में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में जुलाई 2025 से 3% की बढ़ोत्तरी की थी, जिसके बाद डीए/डीआर की दर 55% से बढ़कर 58% हो गई थी ।

इन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

  • राज्य सरकार के नियमित कर्मचारी।
  • ​सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों के शिक्षक।
  • ​पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशनभोगी।

​बता दें कि साल में 2 बार जनवरी व जुलाई से केन्द्र सरकार द्वारा केन्द्रीय कर्मचारियों व पेंशनर्स का महंगाई भत्ता बढ़ाया जाता है, इसके बाद अलग-अलग राज्यों की सरकार द्वारा घोषणा की जाती है। अबतक राजस्थान, बिहार, हरियाणा, कर्नाटक समेत कई राज्यों ने अपने कर्मचारियों पेंशनर्स का डीए बढ़ा दिया है और अब तमिलनाडु सरकार बढ़ोत्तरी की घोषणा की है। इस फैसले के बाद राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का डीए/डीआर केंद्र के समान हो गया है।

क्या होता है मंहगाई भत्ता

  • महंगाई भत्ता एक भुगतान है जो केन्द्र और राज्य सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मुद्रास्फीति के प्रभाव को संतुलित करने के लिए देती हैं। यह वेतन का एक अतिरिक्त हिस्सा होता है, जिसे समय-समय पर महंगाई दर के आधार पर संशोधित किया जाता है। इसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के अनुसार तय करती है।
  • केंद्र सरकार द्वारा हर साल 2 बार केन्द्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की दरों में संशोधन किया जाता है, जो अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक इंडेक्स के छमाही आंकड़ों पर निर्भर करता है। यह वृद्धि हर साल जनवरी/जुलाई से की जाती है, जिसका ऐलान मार्च-अप्रैल और अक्टूबर-नवंबर के आसपास होता है। केन्द्र सरकार के ऐलान के बाद राज्य सरकारों द्वारा घोषणा की जाती है।

Pooja Khodani
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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

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