दिल्ली की CM रेखा गुप्ता ने 1100 छात्राओं को बांटी साइकिल, बेटियों को बताया देवी का स्वरूप, लखपति बिटिया योजना का भी किया जिक्र

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दुर्गा अष्टमी के मौके पर शालीमार बाग के एक सरकारी स्कूल में 1100 छात्राओं को साइकिलें वितरित कीं। इस दौरान उन्होंने बेटियों को देवी का स्वरूप बताया और नवरात्रि को उनके सम्मान व सशक्तिकरण के संकल्प का पर्व कहा। मुख्यमंत्री ने हाल ही में घोषित 'लखपति बिटिया योजना' का भी जिक्र किया, जिसके तहत दिल्ली में जन्म लेने वाली हर बेटी को ग्रेजुएशन पूरी करने तक सरकार 1.25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगी।
दिल्ली की CM रेखा गुप्ता ने 1100 छात्राओं को बांटी साइकिल, बेटियों को बताया देवी का स्वरूप, लखपति बिटिया योजना का भी किया जिक्र

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में 10वीं कक्षा में दाखिला लेने वाली 1100 छात्राओं को साइकिलें वितरित कीं। यह कार्यक्रम पीतमपुरा स्थित सर्वोदय विद्यालय परिसर में आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री से साइकिल पाकर कई छात्राएं भावुक हो उठीं और उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बेटियों को देवी का स्वरूप बताया और उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ का ही नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान और उनके सशक्त भविष्य का संकल्प लेने का भी पर्व है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर सभी को नवरात्रि और दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं दीं और ‘जय माता दी’ के जयकारे के साथ पूरे वातावरण को ऊर्जा से भर दिया।

जन्म से ग्रेजुएशन तक सरकार देगी साथ: लखपति बिटिया योजना

मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में पेश किए गए दिल्ली बजट में उनकी सरकार ने बेटियों, बहनों और महिलाओं के लिए अधिकतम योजनाएं शामिल करने का प्रयास किया है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज के इस वर्ग को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। मुख्यमंत्री ने एक भावुक अंदाज में दिल्ली सरकार की ‘लखपति बिटिया योजना’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अब दिल्ली में जन्म लेने वाली हर बेटी के भविष्य की आर्थिक नींव सरकार खुद रखेगी।

मुख्यमंत्री ने योजना का ब्योरा देते हुए बताया कि बेटी के जन्म से लेकर उसकी पढ़ाई के विभिन्न चरणों तक सरकार सीधे उसके खाते में आर्थिक सहायता जमा करेगी। यह सहायता पहली कक्षा, छठी कक्षा, नौवीं कक्षा और बारहवीं कक्षा में प्रवेश लेने पर प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, कॉलेज के प्रत्येक वर्ष में भी सरकार सीधे बेटी के खाते में वित्तीय मदद जमा करेगी। ग्रेजुएशन पूरी करने तक हर बेटी को लगभग 1.25 लाख रुपये की कुल सहायता मिलेगी, जिससे वह ‘लखपति बिटिया’ बनकर आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ सकेगी। मुख्यमंत्री ने अपनी इच्छा व्यक्त की कि दिल्ली की हर बेटी न केवल स्कूल, बल्कि कॉलेज तक पढ़े, अपने पैरों पर खड़ी हो और अपना भविष्य खुद बनाए।

शिक्षा तक आसान पहुंच के लिए साइकिल वितरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उन्होंने छात्राओं से उनकी समस्याओं के बारे में जाना, तो उन्हें पता चला कि स्कूल आने-जाने में कठिनाई के कारण कई बार उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। कुछ बच्चियों को तो इसी समस्या के चलते स्कूल छोड़ना तक पड़ता है। इसी गंभीर समस्या के समाधान के लिए सरकार ने यह निर्णय लिया है कि हर वर्ष नौवीं कक्षा में प्रवेश लेने वाली प्रत्येक छात्रा को साइकिल दी जाएगी। इस साल दिल्ली में करीब 1,30,000 छात्राओं को इस योजना का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जहां नौवीं कक्षा की छात्राओं को साइकिल सरकार की ओर से दी जाएगी, वहीं इस अवसर पर 10वीं कक्षा में पहुंची छात्राओं को उन्होंने अपनी व्यक्तिगत पहल के तहत साइकिल भेंट की है। मुख्यमंत्री ने छात्राओं से पूछा, “साइकिल चलानी आती है ना?” उन्होंने आगे कहा कि अगर नहीं आती तो वह भी सीख लेना, क्योंकि अब वे अपनी पढ़ाई अपने दम पर पूरी करेंगी।

बेटियों के सम्मान पर राजनीति नहीं

मुख्यमंत्री ने कुछ राजनीतिक टिप्पणियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बेटियों को साइकिल देने जैसी जनकल्याणकारी योजना पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियां बेहद शर्मनाक हैं। उन्होंने कहा कि हमारी बेटियां देवी का स्वरूप हैं, उनके भविष्य के लिए बनाई गई योजनाओं पर ऐसी बातें करना दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने ऐसी सोच पर अपनी शर्म व्यक्त की।

कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब मुख्यमंत्री छात्राओं के बीच जाकर उनसे सीधे संवाद करने लगीं। मुख्यमंत्री से मिलकर कई छात्राएं भावुक नजर आईं तो कुछ छात्राओं की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। किसी छात्रा ने आईएएस बनने का अपना सपना मुख्यमंत्री के साथ साझा किया, तो किसी ने साइकिल मिलने से समय पर स्कूल पहुंचने की खुशी व्यक्त की। एक छात्रा ने कहा कि उसने कभी सोचा नहीं था कि उसे मुख्यमंत्री से मिलने का अवसर मिलेगा, और बेटियों के लिए इतनी सारी योजनाएं देखकर वह बेहद खुश है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

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