Delhi News: तीनों बड़ी पार्टियों ने JPC से बनाई दूरी, AAP ने कहा- लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश

Delhi News: तीनों बड़ी पार्टियों ने JPC से बनाई दूरी, AAP ने कहा- लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश

लोकसभा में पेश किए गए उस विधेयक को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है, जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को 30 दिन से अधिक हिरासत में रहने पर उनके पद से हटाने की बात कही गई है। इस विधेयक की जांच के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से अब आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी बहिष्कार करने का ऐलान किया है। इससे पहले TMC और सपा भी इस समिति से दूरी बना चुकी हैं। AAP ने इस बिल को लोकतंत्र विरोधी और विपक्ष को कमजोर करने वाला बताया है।

JPC को बताया नौटंकी, AAP ने कहा- लोकतंत्र पर हमला

आम आदमी पार्टी ने इस विधेयक को “लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश” करार देते हुए JPC से दूरी बना ली। पार्टी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह बिल सिर्फ विपक्षी नेताओं को झूठे मामलों में फंसाकर जेल भेजने और उनकी सरकारों को गिराने के लिए लाया गया है। AAP ने JPC को “नौटंकी” बताया और कहा कि इसका कोई निष्पक्ष मकसद नहीं है।

TMC और सपा पहले ही कर चुके हैं किनारा

AAP से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) और समाजवादी पार्टी (SP) भी JPC में शामिल होने से इनकार कर चुकी हैं। TMC सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने JPC को “राजनीतिक हथियार” कहा सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस विधेयक को “संघीय ढांचे के खिलाफ” बताया तीनों दलों के इस रुख से अब कांग्रेस पर दबाव बढ़ गया है क्योंकि वह अब तक JPC में शामिल होने के पक्ष में थी। विपक्षी एकता बनाए रखना अब उसके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

विपक्ष का आरोप – दोष सिद्ध हुए बिना कैसे हटेंगे नेता?

विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक उस कानूनी सिद्धांत के खिलाफ है, जिसमें कोई भी व्यक्ति तब तक दोषी नहीं माना जाता जब तक कि अदालत में उसका अपराध साबित न हो जाए। AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इस विधेयक को सरकारों को अस्थिर करने का हथियार बताया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार इस कानून के जरिए विपक्षी नेताओं को साजिशन गिरफ्तार कर सत्ता पलट की तैयारी कर रही है।

सरकार का पक्ष – पारदर्शिता और जवाबदेही की ओर कदम

वहीं दूसरी ओर BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने इस बिल का समर्थन करते हुए इसे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने वाला कदम बताया है। सरकार का दावा है कि यह बिल भ्रष्टाचार रोकने के लिए लाया गया है और इससे राजनीति में साफ-सुथरी छवि वाले लोग आगे आएंगे। JPC में कुल 31 सांसद (21 लोकसभा और 10 राज्यसभा) शामिल हैं। समिति को शीतकालीन सत्र में अपनी रिपोर्ट पेश करनी है, लेकिन AAP, TMC और SP के बहिष्कार से इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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