EPFO: सैलरी लिमिट 15000 से बढ़कर होगी 25000 रुपए! कर्मचारियों को मिलेगा फायदा, दिसंबर जनवरी में अहम बैठक संभव

ईपीएफओ नियमों के अनुसार, नियोक्ता और कर्मचारी दोनों को वेतन का 12 प्रतिशत-12 प्रतिशत हिस्सा हर महीने अंशदान के रूप में देना होता है।
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EPFO salary Limit Update: कर्मचारियों और खाताधारकों के लिए अच्छी खबर है।कर्मचारी भविष्य निधि संगठन जल्द ही कर्मचारियों के लिए अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल होने की वेतन सीमा को बढ़ाने की तैयारी में है। खबर है कि यह लिमिट 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह तक की जा सकती है। इस प्रस्ताव पर दिसंबर 2025 या जनवरी 2026 में होने वाली EPFO की सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में चर्चा हो सकती है।यह सीमा कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) दोनों पर लागू होगी।

वर्तमान में क्या है नियम

फिलहाल 15,000 प्रति महीना से कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को EPF और EPS में शामिल होना जरूरी है। जो कर्मचारी 15,000 से ज्यादा बेसिक सैलरी पाते हैं, उनके पास इन योजनाओं से बाहर निकलने का विकल्प होता है। नियोक्ता पर ऐसे कर्मचारियों को EPF या EPS में शामिल करने की कानूनी बाध्यता नहीं होती। अगर वेतन सीमा 15000 से बढ़कर 25,000 की जाती है, तो करीब 1 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी अनिवार्य रूप से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में आ जाएंगे।नई सीमा के लागू होने से ज्‍यादा संख्या में कर्मचारी इन महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का हिस्सा बन पाएंगे।सीमा 25,000 रुपए तक बढ़ेगी, तो ईपीएफ और ईपीएस दोनों योजनाओं में अंशदान की राशि बढ़ेगी, जिससे भविष्य निधि और पेंशन कोष में वृद्धि होगी।

कैसे होता है कॉन्‍ट्र‍िब्‍यूशन?

ईपीएफओ के नियमों के अनुसार नियोक्ता और कर्मचारी दोनों को हर महीने कर्मचारी के वेतन का 12-12 फीसदी योगदान करना अनिवार्य है। हालांकि, कर्मचारी का पूरा 12 फीसदी ईपीएफ खाते में जाता है, जबकि नियोक्ता का 12 फीसदी ईपीएफ (3.67 फीसदी) और ईपीएस (8.33 फीसदी) के बीच बंट जाता है। ईपीएफओ का कुल कोष वर्तमान में लगभग 26 लाख करोड़ रुपए है, और इसके सक्रिय सदस्यों की संख्या लगभग 7.6 करोड़ है।

EPFO : कैसे तय होती है PF की पेंशन?

वर्तमान में देशभर में लगभग 7 करोड़ एंप्लाय प्रोविडेंड फंड (EPF) के सदस्य हैं।EPS स्कीम में एंप्लायर 12 प्रतिशत के कंट्रीब्यूशन करता है। इसमें से 8.33 फीसदी हिस्सा पेंशन में ट्रांसफर किया जाता है। यह अमाउंट सीधे तौर पर कर्मचारी की पूरी बेसिक सैलरी पर निर्भर नहीं करती है। EPS के तहत मिलने वाली पेंशन आपकी तरफ से EPF अकाउंट में कंट्रीब्यूट की गई पूरी रकम पर निर्भर नहीं होती है, बल्कि पेंशन की रकम कुछ खास कैलकुलेशन पर आधारित होती है। सितंबर 2014 से EPS कंट्रीब्यूशन पर लागू लिमिट के तहत अधिकतम 1,250 रुपये महीने ही EPS अकाउंट में जमा हो सकते हैं। अगर किसी एंप्लायर का कंट्रीब्यूशन इससे ज्यादा है, तो इसकी बाकी की रकम EPF खाते में जमा हो है और योगदान के आधार पर कर्मचारियों को पेंशन मिलती है।

Pooja Khodani
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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

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