
इतिहास में ऐसे कई लोग रहे हैं, जो अचानक ग़ायब हो गए, और वे ग़ायब क्यों हुए, कैसे हुई इस बात का भी आज तक पता नहीं चल सका है। भारत में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अचानक लापता होना सबसे ज़्यादा चर्चित घटनाओं में से एक रहा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनके अलावा भी दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो अचानक ग़ायब हो गए।
क्या आप इतिहास के तीन ऐसे प्रसिद्द व्यक्तियों के बारे में जानते हैं, जो रहस्मयी तरीक़े से अचानक दुनिया से ग़ायब हो गए हैं, और फिर इन्हें कभी ढूंढा नहीं जा सका। आख़िर कौन थे ये लोग, और कैसे भी अचानक इतिहास के पन्नों से ग़ायब हो गए, चलिए आज हम इनके बारे में विस्तार से इस आर्टिकल में जानेंगे। इस लिस्ट में पहला नाम आता है, लुइस ले प्रिंस का।
लुइस ले प्रिंस (Louis Le Prince)
जब कभी भी आप सिनेमेटोग्राफी की हिस्ट्री उठाकर पड़ेंगे या फिर उसके बारे में जानेंगे, तो आपके सामने सबसे पहले थॉमस एडिसन और लुमियर्स ब्रदर्स जैसे नाम आएंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तव में वो व्यक्ति कौन थे , जिनका नाम इतिहास में सबसे पहले आना चाहिए, दरअसल वह व्यक्ति लुईस ले प्रिंस थे। इन्होंने अपने कॉम्पीटिंग थॉमस एडिसन और लुमियर्स ब्रदर्स से ही कई साल पहले, single lens camera के इस्तेमाल से फ़ास्ट मूविंग पिक्चर को रिकॉर्ड किया था। वे मोशन पिक्चर कैमरा को और एडवांस करने का काम कर रहे थे, इतना ही नहीं उन्होंने नवंबर 1888 में अपने कैमरा को इंग्लैंड में पेटेंट भी करवाया था।
लेकिन इतनी मेहनत और कोशिशों के बावजूद भी लुईस का काम ख्याति नहीं पा पाया, क्योंकि अपना काम दुनिया के सामने लाने से पहले ही भी अचानक इस तरह ग़ायब हो गया कि किसी को उनके बारे में पता भी नहीं चल सका। आपको बतादें सितंबर 1890 में लुईस ने अपने इन्वेंशन की पहली सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए अमेरिका जाने का विचार किया, 16 सितंबर 1890 को लुईस ने फ़्रान्स के डीजॉन शहर से पेरिस के लिए ट्रेन ली, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लुईस पेरिस में कभी अपनी डेस्टिनेशन पर नहीं पहुँचे, इतना ही नहीं इसके बाद उन्हें कभी देखा भी नहीं गया। ऐसा नहीं है कि पुलिस और लुईस के परिवार वालों ने उन्हें ढूंढने की कोशिश नहीं की, कोशिशों के बावजूद भी लुईस का कोई पता नहीं चल सका।
इसके बाद लोगों ने तरह तरह की बातें बनायी, कुछ लोगों को लगा कि लुईस शायद किसी घटना का शिकार हुए हैं, वहीं कई लोगों का ऐसा भी कह रहा कि किसी ने पैसों के लालच में लुईस को ग़ायब कर दिया। लेकिन जिस बात को लेकर सबसे ज़्यादा सच माना गया है वह यह है, कि लुईस को शायद किसी ऐसे व्यक्ति ने मार दिया हो जो लुईस की इन्वेंशन को चुराना चाहता हो। लेकिन इस बात में कितना सच है और कितना झूठ इस बात का पता नहीं चल सका। सबसे रोचक बात यह रही कि लुईस के ग़ायब हो जाने के एक साल बाद 1891 में थॉमस एडिसन ने लुईस के कैमरा से मिलता जुलता डिज़ाइन बनाया था। यही कारण है कि जब हम सिनेमेटोग्राफी की हिस्ट्री पड़ते हैं, तब हम देखते हैं कि हिस्ट्री में लुईस ले प्रिंस का नाम कुछ ख़ास ख्याति नहीं पा पाया। लेकिन अर्ली मोशन पिक्चर टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट में लोहित ले प्रिंस के योगदान को देखते हुए आज उनको सिनेमेटोग्राफी का फ़ादर माना जाता है।
जीन स्प्लेंगर (Jean Spengler)
अगर आपने कभी जीन स्प्लेंगर का नाम नहीं सुना है तो आपको बता दें कि यह एक एक्ट्रेस रह चुकी है। इन्होंने कई हॉलीवुड मूवीज़ में काम किया है। 7 अक्टूबर 1949 ये शाम को जीन अपने घर से निकली थी, घर से निकलते वक़्त उन्होंने अपनी ननद को बताया था, कि वे किसी काम के लिए बाहर जा रही है। इसके बाद चीन को कुछ दिनों के बाद घर के पास वाली ग्रॉसरी शॉप पर देखा गया था। इतना ही नहीं चीन के ग़ायब हो जाने के बाद एक पार्क में उनका पर्स भी मिला था, इस बार में एक लेटर भी मिला था, जो कर्क नाम के शख़्स के लिए लिखा गया था, इस लेटर ने तमाम प्रकार के सवाल खड़े कर दिए थे।
कुछ लोगों का ऐसा मानना है, लेटर से ऐसा लग रहा है कि जिन किसी कर्क नाम के व्यक्ति से मिलने गई थी। इसके अलावा लोगों ने तरह तरह की बातें भी बनायी, लेकिन सच गया था इस बात का आज तक पता नहीं चल पाया। जीन एक एक्ट्रेस थी, जिस वजह से यह मुद्दा उस वक़्त चर्चा का विषय बना हुआ था और काफ़ी लंबे वक़्त तक बना रहा। आपको बता दें, जीन केवल 26 साल की थी। पुलिस ने इस मामले में काफ़ी जाँच पड़ताल की, लेकिन कुछ भी हाथ नहीं लग सका। इतना ही नहीं लेटर में जीन ने जिस शख़्स का ज़िक्र किया, उसका भी पता नहीं चल सका।
सुभाष चंद्र बोस (Neta Ji Subhash Chandra Bose)
नेता सुभाष चंद्र बोस को हर भारतीय नागरिक जानता है। भारत की आज़ादी की लड़ाई में उनका बहुत योगदान रहा। नेताजी की ज़िंदगी से जुड़ा रहस्यमय पहलू इस बात को लेकर है, 1945 में प्लेन क्रेश की दुर्घटना के समय उनकी मृत्यु हो गई थी, यहाँ फिर भी हादसे में बच गए थे लेकिन फिर अचानक ग़ायब हो गए। 1941 में सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान, नेता जी सुभाष चंद्र बोस जर्मनी गए थे, जहाँ उन्होंने अंग्रेजों से भारत को आज़ाद कराने के लिए आज़ादी की लड़ाई में एक्सिस पावर से सहायता माँगी थी।
इसके बाद 1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस जापान गए, वहाँ उन्होंने जापान गवर्मेंट की सहायता से, आज़ाद हिंद फ़ौज की फॉर्मेशन की थी। सेकेंड वर्ल्ड वॉर में जर्मनी और जापान की हार के बाद नेताजी को कहीं न कहीं नया रास्ता तलाशना था, इसी के चलते वे 18 अगस्त 1945 को मंचूरिया की तरफ़ जा रहे थे, अपने इसी सफ़र के दौरान वे अचानक ग़ायब हो गए। इस दिन के बाद नेताजी कभी किसी को दिखाई नहीं दिए, नेताजी के साथ आख़िर क्या हुआ इस बात का आज तक पता नहीं चल सका।

