अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण खबर, विभाग ने जारी किए ये निर्देश, करना होगा पालन

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Rajasthan /Maharashtra Dress Code Rule : राजस्थान के बिजली कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। बिजली विभाग ने ड्रेस कोड को लेकर एक आदेश जारी किया है। इसके तहत अब बिजली दफ्तरों में कर्मचारी अधिकारी जींस-टीशर्ट नहीं पहन सकेंगे।इसमें कहा गया है कि अधिकारी और कर्मचारी ड्रेस कोड में ही दफ्तर आएं। एक अन्य आदेश में ड्राइवर, चतुर्थ श्रेणी और तकनीकी कर्मचारियों को भी निर्धारित वर्दी में आने के लिए कहा गया है।इधर, पिछले हफ्ते महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार ने भी स्कूलों में ड्रेस कोड लागू करने को लेकर एक अधिसूचना जारी की है।

अब दफ्तरों में जींस-टीशर्ट नहीं पहनेंगे बिजली अधिकारी-कर्मचारी

राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड के सचिव (प्रशासन) आनंदी लाल वैष्णव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि निगम के कार्यालयों में अधिकारी और कर्मचारी सही ड्रेस की बजाय आरामदायक (कैजुअल) ड्रेस पहनकर कार्यालय में आते हैं। जबकी सरकारी कार्यालयों में तय प्रोटोकाल के तहत ही कपड़े पहनकर आना चाहिए लेकिन कई अधिकारी और कर्मचारी जींस टी-शर्ट और चप्पल पहनकर आते हैं। यह प्रोटोकाल के विरुद्ध और प्रतिबंधित है।एक सरकारी विभाग के प्रोटोकॉल के तहत कर्मचारी जब भी दफ्तर या फील्ड में जाएं. उस वक्त फॉर्मल, साफ सुथरे और डीसेंट कपड़ों में नजर आना जरूरी है।

बीते दिनों महाराष्ट्र सरकार ने भी ड्रेस कोड को लेकर जारी किया था आदेश

  • हाल ही में महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार ने स्कूलों के शिक्षकों के लिए डेसकोड लागू किया है। महाराष्ट्र शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के तहत टीचर्स जींस टीशर्ट नहीं पहन सकते हैं ।अब टीचर्स को स्कूलों में पढ़ाई के दौरान जींस, टी-शर्ट, डिजाइनदार और प्रिंट वाले कपड़े नहीं पहनने की इजाजत नहीं होगी। उनके लिए स्कूल अपने अनुसार टीचर्स के लिए ड्रेस कोड जारी करना होगा।
  • टीचर्स को स्‍कूल में जींस टीशर्ट या डार्क कलर या डिजाइनर या प्रिंटेट कपड़े पहनने की अनुमति नहीं होगी। फीमेल टीचर्स को सलवार या चूडीदार पैजामे के साथ कुर्ता या साड़ी पहनने को कहा गया है। इसी तरह मेल टीचर्स शर्ट और ट्राउजर पहन सकते हैं, हालांकि यह भी गया है कि वह शर्ट को इन करके पहनेंगे।
Pooja Khodani
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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
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