‘अब और बर्दाश्त नहीं कर सकता’, जम्मू-कश्मीर को अलग राज्य का दर्जा देने की मांग पर बोले उमर अब्दुल्ला

दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण को बरकरार रखा और चुनाव आयोग को सितंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने का निर्देश दिया।
Chief Minister Omar Abdullah

नेशनल कॉन्फ्रेंस

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को राज्य के दर्जे को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक हैरी पॉटर थीम वाला मीम साझा किया। इस मीम में सेवेरस स्नेप का किरदार दिखाया गया जिसमें लिखा था, “प्लीज, मैं अब और नहीं सह सकता।” यह पोस्ट तब आई जब मीडिया में खबरें आईं कि केंद्र सरकार बुधवार को संसद में जम्मू-कश्मीर राज्य के दर्जे से संबंधित एक विधेयक पेश कर सकती है। गृह मंत्री अमित शाह भी जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक, 2025 लोकसभा में पेश करने वाले हैं, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक पुनर्गठन बताया जा रहा है।

5 अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था जिसके तहत क्षेत्र को अपनी संविधान, झंडा और आंतरिक मामलों में स्वायत्तता प्राप्त थी। इसके बाद जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू-कश्मीर विधानसभा के साथ और लद्दाख बिना विधानसभा में विभाजित कर दिया गया। केंद्र ने बार-बार कहा है कि उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा, लेकिन कोई समयसीमा नहीं दी गई है।

निरस्तीकरण को बरकरार रखा

दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण को बरकरार रखा और चुनाव आयोग को सितंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने का निर्देश दिया। कोर्ट ने केंद्र से जल्द से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने का भी आग्रह किया। घाटी में कई राजनीतिक दल और कार्यकर्ता राज्य के दर्जे की बहाली और कुछ मामलों में 2019 के फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव, जो एक दशक में पहले थे, में नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन सत्ता में आया जिसने राज्य के दर्जे की मांग को और तेज कर दिया।

स्वतंत्रता दिवस पर संबोधन

उमर अब्दुल्ला इस मुद्दे पर मुखर रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उन्होंने भारत के लोकतंत्र और केंद्र पर भरोसा जताते हुए राजनीतिक जोखिम लिया है। उन्होंने कहा, “मुझे कोई उम्मीद नहीं थी, लेकिन मुझे बार-बार बताया गया कि दस्तावेज तैयार हैं। अब सिर्फ घोषणा बाकी है। लेकिन घोषणा कभी नहीं हुई। उम्मीद की किरण फीकी पड़ रही है, लेकिन हम हार नहीं मानेंगे।”

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