‘हजरतबल दरगाह शांति का प्रतीक’, अशोक चिह्न पर तोड़फोड़ को लेकर क्या बोले किरेन रिजिजू

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस मामले में सवाल उठाए और कहा कि धार्मिक स्थलों पर सरकारी प्रतीकों का उपयोग नहीं किया जाता। हजरतबल दरगाह श्रीनगर में एक पवित्र धार्मिक स्थल है, जहां पैगंबर मुहम्मद का पवित्र अवशेष रखा गया है।
Kiren Rijiju

जम्मू-कश्मीर के हजरतबल दरगाह में अशोक चिह्न के साथ तोड़फोड़ की घटना पर केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि हजरतबल दरगाह शांति का प्रतीक है और पैगंबर मुहम्मद के पवित्र अवशेष के कारण यह विश्वास और एकता का केंद्र है। रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि दरगाह के उद्घाटन पत्थर पर अशोक चिह्न को नुकसान पहुंचाना निंदनीय है। एक वायरल वीडियो में भीड़ को संगमरमर की पट्टिका पर राष्ट्रीय प्रतीक को नष्ट करते देखा गया, जिसमें उन्होंने मूर्तिकला के खिलाफ इस्लामी मान्यताओं का हवाला दिया।

जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष डॉ. दाराख्शां अंद्राबी ने इस घटना को आतंकवादी हमला करार देते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि यह हमला एक राजनीतिक दल के गुंडों द्वारा किया गया, जिन्होंने पहले भी कश्मीर को नुकसान पहुंचाया है। अंद्राबी ने बताया कि हमलावरों ने दरगाह के प्रशासक पर भी हमला किया, जो बाल-बाल बचे। उन्होंने यह भी घोषणा की कि दोषियों की पहचान होने पर उन्हें दरगाह में प्रवेश से आजीवन प्रतिबंधित किया जाएगा और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।

अशोक चिह्न के साथ तोड़फोड़

हजरतबल दरगाह में अशोक चिह्न के साथ तोड़फोड़ ने राष्ट्रीय प्रतीकों और धार्मिक भावनाओं को लेकर विवाद खड़ा कर दिया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता तनवीर सादिक ने अशोक चिह्न की स्थापना को इस्लामी सिद्धांतों का उल्लंघन बताया, जो मूर्ति पूजा को निषिद्ध मानते हैं। वहीं, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इस स्थापना को ईशनिंदा करार देते हुए वक्फ बोर्ड को भंग करने की मांग की।

सरकारी प्रतीकों का उपयोग

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस मामले में सवाल उठाए और कहा कि धार्मिक स्थलों पर सरकारी प्रतीकों का उपयोग नहीं किया जाता। हजरतबल दरगाह श्रीनगर में एक पवित्र धार्मिक स्थल है, जहां पैगंबर मुहम्मद का पवित्र अवशेष रखा गया है। इस घटना ने राष्ट्रीय प्रतीकों और धार्मिक संवेदनाओं के बीच संतुलन पर बहस को और तेज कर दिया है।

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