‘कांग्रेस के समय बैंक बनते थे, मोदी राज में बिकते हैं’, IDBI की हिस्सेदारी बेचने पर भड़के राहुल गांधी, कहा- मैं कर्मचारियों के साथ

निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने गुरुवार को बताया कि IDBI बैंक के रणनीतिक विनिवेश के लिए दूसरे चरण की बोली प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
Rahul Gandhi in IDBI Bank employees support

Rahul Gandhi in IDBI Bank employees support

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने IDBI बैंक की बड़ी हिस्सेदारी बेचने पर केंद्र की मोदी सरकार पर बड़ा निशाना साधा है, राहुल गांधी ने कहा कांग्रेस के समय देश का उद्योग खड़ा करने के लिए बैंक खोले गए लेकिन मोदी सरकार इन बैंकों को बेच रही है, उन्होंने बैंक कर्मचारियों के नाम सोशल मीडिया पर लिखे पत्र में कहा एकजुट रहें, दृढ़ रहें, मैं आपके साथ खड़ा हूँ ।

राहुल गांधी ने आज शुक्रवार को X पर IDBI बैंक कर्मचारियों के नाम लिखे पत्र में कहा – कांग्रेस के समय में देश का उद्योग खड़ा करने के लिए IDBI बना था, लेकिन मोदी सरकार के समय पहले बोली देखी गई, फिर दाम तय हुआ। उन्होंने तंज कसा कांग्रेस के समय बैंक बनते थे, मोदी के समय बिकते हैं।

राहुल गांधी ने लिखा – पिछले साल मार्च में, आपमें से कुछ लोग संसद भवन में मुझसे मिलने आए थे। आपने मुझसे एक सीधा-सा सवाल पूछा था, सरकार उस बैंक को क्यों बेच रही है, जिसे आप लोगों ने मुनाफे में ला खड़ा किया है? मैंने यह सवाल लोकसभा में उठाया। मैंने पूछा कि मुनाफे में चल रहे एक सरकारी बैंक को क्यों बेचा जा रहा है, और इसके कर्मचारियों तथा जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा कैसे की जाएगी। सरकार ने कोई कारण नहीं बताया। अब उसने IDBI बैंक को कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स को बेचने का फैसला किया है।

पिछले साल IDBI ने कमाया नौ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा 

IDBI की शुरुआत एक अग्रणी विकास बैंक के रूप में हुई थी। एक कमर्शियल बैंक बनने का सफर मुश्किल रहा है लेकिन आपने चुनौतियों का सामना किया है। सात साल पहले IDBI को नुकसान हो रहा था। पिछले साल इसने नौ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा कमाया। यह बदलाव आपकी मेहनत का नतीजा है। जनता के पैसे से बनी संस्था जनता की ही होती है। आज, इस बैंक का 95 प्रतिशत हिस्सा सरकार और LIC के पास है। बिक्री के बाद, उनके पास 34 प्रतिशत हिस्सा रह जाएगा।

संसद में किया अपना वादा भूली सरकार 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा 2003 में सरकार ने संसद से वादा किया था कि वह IDBI में हमेशा कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने पास रखेगी। भले ही यह वादा कानून में दर्ज न हो लेकिन संसद से किया गया वादा भारत की जनता से किया गया वादा है।
जब IDBI निजी स्वामित्व में चला जाएगा, तो SC, ST और OBC उम्मीदवारों के लिए आरक्षण भी खत्म हो जाएगा। आपकी सेवा शर्तें, जो पहले ही कमजोर हो चुकी हैं, अपना आखिरी सुरक्षा कवच भी खो देंगी।

एकजुट रहें, दृढ़ रहें, मैं आपके साथ खड़ा हूँ 

राहुल ने लिखा-  कांग्रेस का हमेशा से यह मानना ​​रहा है कि निजी क्षेत्र के साथ-साथ एक मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र भी होना चाहिए। सार्वजनिक बैंक कोई ऐसी संपत्ति नहीं हैं जिन्हें बेच दिया जाए, बल्कि ये राष्ट्र निर्माण के साधन हैं। आपने मुझसे आपके साथ खड़े होने के लिए कहा था, आज मैं आपकी लड़ाई में आपके साथ खड़ा हूँ और आपकी सभी जायज मांगों का पूरा समर्थन करता हूँ। एकजुट रहें, दृढ़ रहें।

कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेची हिस्सेदारी

गौरतलब है कि केंद्र सरकार और एलआईसी (LIC) ने IDBI बैंक में अपनी कुल 60.72% हिस्सेदारी लगभग 52,878 करोड़ रुपये (81 रुपये प्रति शेयर की बोली पर) में कनाडा के उद्योगपति प्रेम वत्स की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स (Fairfax Financial Holdings) को रणनीतिक बिक्री के रूप में सौंपने का फैसला किया है। इस सौदे के तहत केंद्र सरकार अपनी 30.48% और LIC अपनी 30.24% हिस्सेदारी बेचेगी। इसके बाद सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% हिस्सेदारी बनी रहेगी।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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