पेंशनरों के लिए महत्वपूर्ण खबर, एरियर भुगतान पर नया अपडेट, सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये आदेश, जल्द खाते में आएगी राशि

employees news

OROP Pensioners : वन रैंक वन पेंशन योजना के पेंशनरों के लिए ताजा अपडेट है।आज सोमवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बलों के रिटायर्ड कर्मियों को पेंशन न दिए जाने और किस्तों में एरियर का भुगतान पर नाराजगी जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रक्षा मंत्रालय ‘वन रैंक वन पेंशन’ के बकाए का भुगतान 4 किस्तों में करने संबंधी परिपत्र जारी कर कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता है, ऐसे में 20 जनवरी के परिपत्र को रक्षामंत्रालय तुरंत वापस लें।इस मामले में अगली सुनवाई 20 मार्च को होगी।बता दे कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत पेंशनरों को 15 मार्च तक एरियर का भुगतान होना है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- नोटिफिकेशन वापस लें सरकार

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने ओआरओपी पर केंद्रीय रक्षा मंत्रालय के हालिया कम्युनिकेशन पर नाराजगी जताते हुए इसे वापस लेने को कहा। कोर्ट ने मंत्रालय से अपने 20 जनवरी के परिपत्र को तुरंत वापस लेने के निर्देश दिए है और कहा कि एरियर को चार किस्तों में भुगतान करने का पत्र जारी कर आप कानून को हाथ में नहीं ले सकते हैं । रक्षा मंत्रालय का 20 जनवरी का परिपत्र पूरी तरह से उसके फैसले के विपरीत था और वह अपनी ओर से एकतरफा यह नहीं कह सकता कि वह चार किस्तों में ओआरओपी का बकाया भुगतान करेगा। हैरानी की बात ये है कि एक महीने में यह दूसरी बार है जब सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया है।

केन्द्र ने फिर मांगा समय

सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि केंद्र ने ओआरओपी बकाया की एक किस्त का भुगतान पूर्व सैनिकों को कर दिया है, लेकिन अगले भुगतान के लिए उसे कुछ और समय की जरूरत है। इस पर पीठ ने कहा कि रक्षा मंत्रालय के पहले ये कदम उठाना होगा, इसके बाद ही केंद्र की पेंशन बकाया देने के लिए और समय देने की अर्जी पर सुनवाई करेंगे। पीठ ने अटार्नी जनरल को भुगतान की जाने वाली राशि, अपनाए जाने वाले तौर-तरीकों और बकाया भुगतान के लिए प्राथमिकता आदि का विवरण देते हुए एक नोट तैयार करने को कहा और AG से अगले सोमवार तक पेंशन बकाया के भुगतान के बारे में सारी जानकारी जैसे कितना भुगतान बकाया है और इसे कितनी टाइमलाइन में चुकाया जाएगा, देने को कहा है।

ये है पूरा मामला

दरअसल वन रैंक वन पेंशन योजना के तहत 25 लाख से अधिक पेंशनर्स को बकाए का भुगतान किया जाना है।पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार को एक किस्त में पेंशनर्स के बकाए का भुगतान किए जाने के निर्देश दिए गए थे, वही भुगतान में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय से सवाल करते हुए रक्षा सचिव से पूछा गया था कि अदालत द्वारा दिए गए समय सीमा में भुगतान के आदेश की अवहेलना करते हुए एक तरफा समय सीमा बढ़ाने पर क्या स्पष्टीकरण है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 15 मार्च से पहले एरियर का भुगतान किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने एक ही किस्त में सभी बकाए के भुगतान के निर्देश दिए थे। इस मामले में मुख्य न्यायाधीश वाईएस चंद्रचूड़ के अलावा पीएस नरसिम्हा और पारदीवाला की पीठ के समक्ष फैसला हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट के बाद सरकार ने जारी किए थे ये निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश के बाद मोदी की तरफ से एक विज्ञप्ति जारी की गई है। जिसमें बैंक, लेखा कार्यालय, पेंशन वितरण अधिकारी और अन्य संबंधित एजेंसी को निर्देश देते हुए कहा गया कि मार्च 2023 से पहले सभी पात्र पेंशन भोगियों को एरियर का समय सीमा पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। बकाया भुगतान के लिए के लिए कार्रवाई तेज हो गई है। 15 मार्च तक पेंशनर्स के खाते में राशि देखी जाएगी।वन रैंक वन पेंशन योजना के तहत रक्षा पेंशन भोगी जो 2014 में सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके परिवार और पेंशन भोगियों को वन रैंक वन पेंशन योजना का लाभ दिया जाएगा। रक्षा मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार व्यय 42470 करोड़ रुपए है।

किसको कितना मिलेगा एरियर

वन रैंक वन पेंशन योजना के रिवाइज्ड पेंशनर के मुताबिक सिपाही को 87000 रूपए एरियर के रूप में मिलेंगे। नायक को 30 जून 2022 की स्थिति में 114000 रूपए एरियर ,मेजर को एरियर 305000, हवलदार 70000,नायब सूबेदार को 108000, सब मेजर 175000,ब्रिगेडियर 5 लाख 5 हजार रुपए,लेफ्टिनेंट कॉलोनल को 455000 रूपए ,कॉलोनल को 442000 और लेफ्टिनेंट जनरल को 432000 रूपए एरियर का भुगतान किया जाएगा वही मेजर जनरल को 390000 रूपए एरियर के रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे।इसमें पिछली किस्त के हिसाब से कुछ बदलाव भी हो सकता है।

Pooja Khodani
लेखक के बारे में
Pooja Khodani

12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
Follow Us :GoogleNews