
Nitin Gadkari says Petitions against government in court are necessary discipline administration
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को अखिल भारतीय महानुभाव परिषद के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोगों से ईमानदारी और समर्पण के साथ जीवन जीने की अपील की। उन्होंने कहा कि शॉर्टकट से तेजी से सफलता मिल सकती है, लेकिन यह दीर्घकालिक विश्वसनीयता को कमजोर करती है। गडकरी ने भगवद गीता का हवाला देते हुए कहा, ‘अंत में सत्य की ही जीत होती है।‘ उन्होंने चक्रधर स्वामी के सत्य, अहिंसा, शांति, मानवता और समानता के मूल्यों को अपनाने पर जोर दिया, जो जीवन का आधार हैं।
गडकरी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनके कार्यक्षेत्र में सच्चाई बोलना निषिद्ध है। उन्होंने कहा, “जो लोग सबसे अच्छा धोखा दे सकते हैं, वही सबसे अच्छे नेता बन सकते हैं।” हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्य और ईमानदारी ही स्थायी सफलता की कुंजी है। गडकरी ने महानुभाव संप्रदाय के संस्थापक चक्रधर स्वामी की शिक्षाओं की सराहना की और कहा कि ये सभी के लिए प्रेरणादायक हैं।
अदालत में याचिकाएं दायर
इसके अलावा, गडकरी ने पहले भी कई बार अपनी स्पष्टवादिता से चर्चा बटोरी है। इस महीने की शुरुआत में उन्होंने कहा था कि सरकार के खिलाफ अदालत में याचिकाएं दायर करने से सार्वजनिक प्रशासन में अनुशासन आता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि लोकप्रिय राजनीति अक्सर मंत्रियों के काम में बाधा बनती है, क्योंकि कुछ कार्य केवल अदालती आदेशों से ही संभव हो पाते हैं।
अवसरवादी नेताओं पर चिंता
पिछले साल गडकरी ने अवसरवादी नेताओं पर चिंता जताते हुए कहा था कि कुछ लोग सत्तारूढ़ दल के साथ रहना चाहते हैं, जो लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। उन्होंने मजाक में कहा था कि अच्छा काम करने वालों को सम्मान नहीं मिलता और बुरा काम करने वालों को सजा नहीं मिलती। गडकरी ने पहले भी ट्रैफिक अनुशासन के लिए अवैध पार्किंग की शिकायत करने वालों को 500 रुपये का इनाम देने और वाहनों के हॉर्न को भारतीय वाद्ययंत्रों से बदलने जैसे अनोखे सुझाव दिए थे।
