सार्वजनिक स्थलों पर होने वाली गतिविधियों पर रोक नहीं! कर्नाटक सरकार को लगा हाईकोर्ट से बड़ा झटका, सुनाया ये फैसला

कर्नाटक (Karnataka) हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर से रोक हटाने से इनकार कर दिया, जिसमें सड़कों, पार्कों और खेल मैदानों जैसे सार्वजनिक स्थलों पर 10 से अधिक लोगों की बिना अनुमति सभा पर रोक लगाई गई थी।
सार्वजनिक स्थलों पर होने वाली गतिविधियों पर रोक नहीं! कर्नाटक सरकार को लगा हाईकोर्ट से बड़ा झटका, सुनाया ये फैसला

कर्नाटक (Karnataka) सरकार को एक बार फिर हाईकोर्ट से फटकर लगी है। हाईकोर्ट (High Court) ने राज्य सरकार के उस आदेश पर से रोक हटाने से इनकार कर दिया, जिसमें सड़कों, पार्कों और खेल मैदानों जैसे सार्वजनिक स्थलों पर 10 से अधिक लोगों की बिना अनुमति सभा पर रोक लगाई गई थी। अगर कहा जाए तो कर्नाटक सरकार को इस फैसले पर दूसरी बार निराशा हाथ लगी है। इससे पहले भी इसी याचिका पर कोर्ट का झटका लगा था।

राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एस.जी. पंडित और न्यायमूर्ति गीथा के.बी. की डिवीजन बेंच ने कहा कि वे एकल न्यायाधीश द्वारा पारित अंतरिम आदेश (स्टे) में हस्तक्षेप नहीं करेंगी और राज्य सरकार को सलाह दी कि वह इस संबंध में उसी सिंगल जज के समक्ष जाकर स्टे हटाने की अर्जी दाखिल करे।

बता दें कि इस मामले में कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता को यह स्वतंत्रता दी जाती है कि वे अंतरिम आदेश को निरस्त करने के लिए आवेदन दाखिल करें। यदि ऐसा आवेदन किया जाता है तो हमें विश्वास है कि माननीय एकल न्यायाधीश उस पर विचार करेंगे। सभी दलीलों को खुला रखा जाता है। लेकिन बेंच ने कहा कि ऐसे मामलों में सिंगल जज को दरकिनार करना उचित नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

राज्य सरकार ने 18 अक्टूबर को एक आदेश जारी किया था, जिसमें सार्वजनिक स्थलों पर 10 से अधिक लोगों की बिना अनुमति सभा को प्रतिबंधित किया गया था। बताया जा रहा है कि यह आदेश राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा प्रस्तावित मार्चों के मद्देनजर जारी किया गया था, जो संगठन के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले थे। हालांकि सरकारी आदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि आदेश के प्रावधानों का मकसद हिंदू दक्षिणपंथी संगठन की गतिविधियों, रूट मार्च पर असर डालना है।

इसके बाद 28 अक्टूबर को न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी थी। राज्य सरकार ने इस अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन बेंच ने आज स्पष्ट कहा कि वह एकल न्यायाधीश के आदेश में हस्तक्षेप नहीं करेगी।

Shyam Dwivedi
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Shyam Dwivedi

7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi →
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