PM Modi ने किया विवेका स्मारका का उद्घाटन, बोले- युवाशक्ति का स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना बहुत जरूरी

प्रधानमंत्री ने कहा हमें इस स्मारक में ऐसे युवाओं को गढ़ना है, जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित, गरीब और वंचित के दुःख आने सुख-दुःख से ऊपर हो। जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो, मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो।
PM Narendra Modi inaugurated Viveka Smaraka in Mysuru

PM Narendra Modi inaugurated Viveka Smaraka in Mysuru

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मैसूरु में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र “विवेका स्मारका” का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने युवा शक्ति के प्रतीक स्वामी विवेकानंद से जुड़े संस्मरण याद किये और युवाओं से उन्हें आत्मसात करने की अपील की, प्रधानमंत्री ने कहा भारत एक युवा देश है, पिछले कुछ समय में देश के युवाओं ने बहुत से ऐसे नवाचार किये जिसने दुनिया को प्रभावित किया है, आने वाला समय उनका ही है इसलिए युवाशक्ति का स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना बहुत जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने कहा व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता। इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएं देनी होती है, साधनाएं करनी होती हैं, तप करना होता है, खुद को तपाना और खपाना पड़ता है। ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है। लेकिन तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता। जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है।

पीएम ने कहा करीब 130 वर्ष पहले स्वामी जी एक  युवा सन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए यहां आए थे। तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी, लेकिन विचार उतने ही ऊंचे थे। उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना जो उनके साथ जुड़े उनमें से एक प्रमुख मैसूरु के तत्कालीन महाराजा का भी था। जब स्वामी विवेकानंद अमेरिका में थे, तब उन्होंने वहां से मैसूरु के महाराजा को एक पत्र लिखा था, उसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था। स्वामी विवेकानंद ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था। उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था।

ऐसे युवाओं को गढ़ना है जिनके लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो

प्रधानमंत्री ने कहा शिक्षा और स्वास्थ से जुड़ी सेवाएं हों या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद की विरासत को जीवंत रखा है। मुझे विश्वास है कि विवेका स्मारका (Viveka Smaraka) साधकों और श्रद्दालुओं के लिए आत्मिक उत्थान के एक तीर्थ बनेगा। स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा थी शिव ज्ञाने, जीव सेवा, यानी जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। हमें इस स्मारक में ऐसे युवाओं को गढ़ना है, जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित, गरीब और वंचित के दुःख आने सुख-दुःख से ऊपर हो। जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो, मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो।

स्वामी विवेकानंद राष्ट्र उत्थान के लिए शिक्षा के साथ-साथ समानता को भी उतना ही अहम मानते थे। शिक्षा में भेदभाव न हो, अवसरों में भेदभाव न हो, आज ये देश का विजन बन गया है। हम आधुनिक दौर की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए शिक्षा प्रणाली को नया रूप देने के साथ-साथ शैक्षिक बुनियादी ढांचे को भी आधुनिक बना रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत के युवाओं को 21वीं सदी की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार कर रही है।

खेलों को राष्ट्र निर्माण की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है

मोदी ने कहा युवाशक्ति का स्वस्थ्य, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना बहुत जरूरी है। जो देश खेलों को महत्व देते हैं, वहां के युवाओं में इन तीनों गुणों का तेजी से विकास होता है। इसलिए आज खेलों को राष्ट्र निर्माण की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फ़ोन निर्माता बन गया है, और इसका श्रेय भारत के युवाओं की ताकत को जाता है। आज भारत में विकसित डिजिटल समाधान दुनिया भर के कई देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं, और इसका कारण भी भारत के युवाओं की ताकत ही है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
Follow Us :GoogleNews