पीएम मोदी और पुतिन ने की कार में सवारी, भारत-रूस के मजबूत रिश्तों का खास प्रदर्शन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत के रूसी तेल आयात पर 50 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाने के फैसले ने इस मुलाकात को और महत्वपूर्ण बना दिया। यह टैरिफ ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों का हिस्सा है, जिसने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है।
पीएम मोदी और पुतिन ने की कार में सवारी, भारत-रूस के मजबूत रिश्तों का खास प्रदर्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान एक साथ ‘मेड इन रूस’ औरस सेडान कार में सवारी कर भारत-रूस के मजबूत रिश्तों का प्रदर्शन किया। दोनों नेता तियानजिन में रिट्ज-कार्लटन होटल की ओर द्विपक्षीय वार्ता के लिए एक साथ रवाना हुए। मोदी ने एक्स पर इस अनोखे कारपूल का जिक्र करते हुए लिखा, “राष्ट्रपति पुतिन के साथ बातचीत हमेशा उपयोगी होती है।”

दोनों नेताओं की यह मुलाकात वैश्विक व्यापार और भू-राजनीति के संवेदनशील दौर में हुई। द्विपक्षीय वार्ता में ऊर्जा साझेदारी, रक्षा सहयोग और वैश्विक व्यवस्था पर चर्चा हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत के रूसी तेल आयात पर 50 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाने के फैसले ने इस मुलाकात को और महत्वपूर्ण बना दिया। यह टैरिफ ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों का हिस्सा है, जिसने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है।

भारत के तीन प्रमुख लक्ष्य

पीएम मोदी ने एससीओ सत्र में भारत के तीन प्रमुख लक्ष्यों (सुरक्षा, संपर्क और अवसर) पर जोर दिया। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ एकजुट कार्रवाई की अपील की और भारत द्वारा चार दशकों से सहन किए गए आतंकी हमलों, जैसे हालिया पहलगाम हमले, का जिक्र किया। उन्होंने दोहरे मापदंडों के खिलाफ चेतावनी दी और एससीओ-रैट्स जैसे तंत्रों के जरिए एकजुटता की जरूरत बताई। इसके अलावा, उन्होंने बिना नाम लिए चीन की बेल्ट एंड रोड पहल को खारिज करते हुए चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे जैसे भारत-प्रायोजित परियोजनाओं को बढ़ावा दिया।

हल्के-फुल्के पल भी दिखे

दिन के दौरान मोदी, पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हल्के-फुल्के पल भी देखे गए। मोदी ने शी के साथ सात साल बाद पहली द्विपक्षीय मुलाकात की, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और गलवान संघर्ष के बाद तनावपूर्ण भारत-चीन संबंधों पर चर्चा हुई। यह दौरा 2020 के गलवान संकट के बाद मोदी की चीन की पहली यात्रा होने के कारण, विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा।

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