“यह पुरस्कार बिकता है” 33 साल बाद मिले फिल्मफेयर अवॉर्ड को लेकर क्या बोले रवि किशन

उन्हें फिल्म ‘लापता लेडीज़’ के लिए ये सम्मान मिला है जिसमें वे पुलिस अधिकारी के किरदार में नज़र आते हैं। एक छोटे कस्बे का चतुर, मज़ाकिया और संवेदनशील पुलिस अफसर जो दो दुल्हनों के गुमशुदा होने की जांच करता है। उनका अभिनय, देसी अंदाज़, कॉमिक टाइमिंग और ईमानदारी से भरा यह रोल फिल्म का यादगार हिस्सा बन गया है। और अब इसी किरदार ने उन्हें फिल्मफेयर भी दिलाया है।
Ravi Kishan

Ravi Kishan Filmfare

रवि किशन ने कहा कि उन्होंने 33 साल तक फिल्मफेयर अवॉर्ड की प्रतीक्षा की है। उन्होंने कहा कि वो ठानकर बैठे थे कि जब तक उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नॉमिनेट नहीं किया जाएगा वो इस फंक्शन में नहीं जाएंगे और आख़िरकार उनकी ज़िद रंग लाई। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें ये लगता था कि फिल्मफेयर अवॉर्ड बिकता है या इसमें पक्षपात होता है लेकिन अब उनकी सारी भ्रांति दूर हो गई है।

उन्होंने इस अवॉर्ड को महादेव और अपनी पत्नी को समर्पित किया है। साथ ही फिल्म के निर्माता निर्देशक को भी इसका श्रेय दिया है। सुप्रसिद्ध अभिनेता ने कहा कि इंडस्ट्री में न तो उनका कोई गॉडफादर था न ही कोई गुरु। उन्होंने अपनी मेहनत और कला के दम पर अपनी पहचान बनाई और अब ये अवॉर्ड हासिल किया है।

रवि किशन को लापता लेडीज़ के लिए मिला फिल्मफेयर अवॉर्ड

बीजेपी सांसद और प्रसिद्ध अभिनेता रवि किशन को फिल्म लापता लेडीज़ के लिए फिल्मफेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया है। 70वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में फिल्म ‘लापता लेडीज़’ में उनकी शानदार एक्टिंग के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवार्ड मिला है। किरण राव के निर्देशन में बनी फिल्म ‘लापता लेडीज़’ ने इस बार फिल्मफेयर में कुल 13 पुरस्कार जीतकर रिकॉर्ड बनाया। फिल्म ने ‘बेस्ट फिल्म’, ‘बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर’, और ‘बेस्ट स्क्रीनप्ले’ जैसी प्रमुख श्रेणियों में भी अवॉर्ड जीते है।

अभिनेता ने कहा “मुझे लगा फिल्मफेयर अवॉर्ड बिकता है” 

फिल्मफेयर अवार्ड जीतने के बाद अभिनेता रवि किशन ने इसे 33 साल के इंतज़ार का फल बताया है। उन्होंने एएनआई से बात करते हुए कहा कि “हम तैंतीस साल तड़पे हैं इसके लिए। कला की सारी विधाओं को जानते हुए हमको सम्मान नहीं मिला। हमको लगा था हमको बिकता है ये अवार्ड। या भोजपुरी हैं हिंदीभाषी नहीं हूं या फिल्मी परिवार से नहीं हूं तो नहीं दे रहे हैं। लेकिन वो सारी भ्रांतियां झूठ साबित हुई। फिल्मफेयर को धन्यवाद, ज्यूरी को धन्यवाद, डायरेक्टर किरण राव और प्रोड्यूसर आमिर खान को धन्यवाद। देश की जनता को धन्यवाद कि मेरा साथ नहीं छोड़ा। मैं इसका इंतज़ार कर रहा था और ज़िद पकड़ी थी कि जब तक मेरा नॉमिनेशन नहीं होगा तब तक मैं इस फंक्शन में नहीं जाऊंगा। मेरा नाम नॉमिनेट हुआ और मैं जीत कर आया। तैंतीस साल तक की ज़िद को सब याद रखेंगे। मुझे अपनेआप पर विश्वास था। मेरा कोई गॉडफादर नहीं था। स्वयं पर विश्वास था और शिवजी पर विश्वास था। मुझे पार्टी ने शूटिंग करने से कभी नहीं रोका। मेरी कला मेरी मूल पहचान है। लापता लेडीज़ ऑस्कर तक गई।” उन्होंने इस अवार्ड का श्रेय महादेव, अपने परिवार, पत्नी और फिल्म के प्रोड्यूसर डायरेक्टर को दिया है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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