सुप्रीम कोर्ट में CJI गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की दिग्विजय सिंह ने की निंदा, दलित विरोधी मानसिकता बताते हुए दोषी को कठोर दंड की मांग

प्रधानमंत्री ने इस घटना की निंदा की और इसे शर्मनाक बताया। विपक्षी दलों ने इसे जातिगत भेदभाव और संविधान पर हमला बताया है। वहीं इस घटना के बाद CJI ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वकील के खिलाफ कोई औपचारिक कार्रवाई न की जाए। इस बीच, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने किशोर को तत्काल प्रभाव से प्रैक्टिस से निलंबित कर दिया है।
Digvijaya Singh

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भारत के सर्वोच्च न्यायालय में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की कोशिश ने सनसनी मचा दी है। इस घटना पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कठोर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए इसे दलित समुदाय के प्रति भेदभावपूर्ण मानसिकता से जोड़ा और दोषी को कठोर दंड देने की मांग की।

घटना सोमवार दोपहर को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 1 में घटी, जब वकील राकेश किशोर ने CJI गवई की ओर जूता फेंकने का प्रयास किया। किशोर को तुरंत सुरक्षाकर्मियों और अन्य वकीलों ने पकड़ लिया। हिरासत में ले जाए जाते समय किशोर ने “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारे लगाए।

दिग्विजय सिंह ने CJI पर हमले की निंदा की, सजा की मांग 

दिग्विजय सिंह ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि “मैं इस घटना का घोर विरोध करता हूं और इसकी कड़ी निंदा करता हूं। उस मानसिकता का विरोध करता हूं कि इस देश के चीफ जस्टिस के पद पर कोई दलित बैठ गया तो क्या उसके साथ इस प्रकार का व्यवहार किया जाएगा। मैं इस मानसिकता का घोर विरोध करता हूं और इसे कठोर से कठोर दंड मिलना चाहिए।”

घटना के बाद फिर छिड़ा जातिगत भेदभाव का मुद्दा

बता दें कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने 71 वर्षीय वकील राकेश किशोर ने जूता फेंकने का प्रयास किया। यह हरकत खजुराहो मंदिर परिसर में भगवान विष्णु की मूर्ति की बहाली से जुड़े एक मामले में CJI की टिप्पणियों से नाराजगी का परिणाम बताई जा रही है। इस घटना के बाद CJI ने शांतिपूर्ण रवैया अपनाते हुए सुनवाई जारी रखी। उन्होंने कहा “ये चीजें मुझ पर असर नहीं डालतीं। इससे विचलित न हों, हम विचलित नहीं हैं। सुनवाई जारी रखें।  हालांकि राजनीतिक और कानूनी हलकों में इससे जुड़ी कई प्रतिक्रिया आई है और इस घटना ने सामाजिक भेदभाव और न्यायपालिका की सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। इस बीच बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने राकेश किशोर को तत्काल प्रभाव से प्रैक्टिस से निलंबित कर दिया और इसे “कोर्ट की गरिमा के अनुरूप न होने वाला आचरण” बताया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने भी इस कृत्य की कड़ी निंदा की है।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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