तेलंगाना में IPS अफसरों की कमी, दिल्ली में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अमित शाह से की मुलाकात, इन मुद्दों पर हुई चर्चा

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर राज्य में IPS अधिकारियों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि बढ़ती प्रशासनिक और सुरक्षा जरूरतों के बीच मौजूदा 83 पद पर्याप्त नहीं हैं और इसे 105 किया जाना चाहिए। बैठक में पिछड़े इलाकों के विकास, कैडर रिव्यू और माओवादी सरेंडर-रीहैबिलिटेशन पर भी चर्चा हुई।
तेलंगाना में IPS अफसरों की कमी, दिल्ली में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अमित शाह से की मुलाकात, इन मुद्दों पर हुई चर्चा

कांग्रेस शासित तेलंगाना ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की कमी का मुद्दा सीधे केंद्र के सामने रखा है। मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने बुधवार रात दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के दौरान राज्य में IPS कैडर की स्वीकृत संख्या 83 से बढ़ाकर 105 करने का अनुरोध किया। राज्य सरकार का कहना है कि प्रशासनिक दायरा और सुरक्षा चुनौतियां दोनों तेजी से बढ़ी हैं, जबकि अधिकारी संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ी।

राज्य सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने केवल पुलिस कैडर का मसला ही नहीं उठाया, बल्कि तेलंगाना के पिछड़े क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए केंद्र से वित्तीय सहायता जारी रखने की भी अपील की। यह आग्रह उस समय आया है जब राज्य सरकार सुरक्षा और विकास, दोनों मोर्चों पर समानांतर दबाव की बात कर रही है।

कैडर रिव्यू पर तेलंगाना की आपत्ति और 2026 की मांग

मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री को बताया कि आंध्र प्रदेश से अलग राज्य बनने के बाद तेलंगाना का पहला IPS कैडर रिव्यू 2016 में हुआ था। अगला रिव्यू 2021 में होना था, लेकिन इसमें देरी हुई और प्रक्रिया 2025 में पूरी हो सकी। राज्य के अनुसार, उस रिव्यू में तेलंगाना को केवल 7 अतिरिक्त IPS अधिकारी मिले, जो उसकी जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं माने जा रहे।

इसी संदर्भ में रेड्डी ने तीसरे कैडर रिव्यू को तय समय-सारणी के मुताबिक 2026 में कराने की मांग भी रखी। राज्य सरकार का तर्क है कि नियमित और समयबद्ध रिव्यू से ही वास्तविक जरूरत के अनुसार कैडर योजना बनाई जा सकती है।

साइबर क्राइम से ड्रग तस्करी तक बढ़ती चुनौतियां

बैठक में मुख्यमंत्री ने तेलंगाना के सामने मौजूद नए सुरक्षा जोखिमों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, राज्य को साइबर क्राइम, ड्रग ट्रैफिकिंग, व्हाइट-कॉलर अपराध और अन्य उभरते खतरों का सामना करना पड़ रहा है। इन अपराधों की जांच और रोकथाम में विशेष कौशल वाले वरिष्ठ पुलिस नेतृत्व की जरूरत बढ़ती है, और यही कारण है कि राज्य अधिक IPS पदों की मांग पर जोर दे रहा है।

तेलंगाना सरकार का कहना है कि पारंपरिक कानून-व्यवस्था से आगे अब डिजिटल, वित्तीय और अंतरराज्यीय अपराधों की प्रकृति बदली है। ऐसे मामलों में कमांड, समन्वय और विशेष इकाइयों की निगरानी के लिए पर्याप्त कैडर जरूरी होता है।

माओवादी सरेंडर और रीहैबिलिटेशन पर भी चर्चा

मुख्यमंत्री और गृह मंत्री की बातचीत में माओवादी गतिविधियों और सरेंडर नीति भी एक अहम विषय रहा। हाल में तेलंगाना पुलिस के सामने कई माओवादी नेताओं के समर्पण का जिक्र बैठक में किया गया। राज्य सरकार ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में पुलिसिंग व्यवस्था में सुधार दर्ज हुआ है और इसका असर जमीनी स्तर पर दिखाई दिया है।

“बैठक में, दोनों नेताओं ने माओवादियों के सरेंडर और उनके रिहैबिलिटेशन के मसले पर चर्चा की।”- राज्य सरकार का बयान

सरकारी बयान के अनुसार, पिछले दो वर्षों में 591 माओवादियों ने हथियार छोड़े और मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार नियमों के तहत उन्हें मुआवजा और पुनर्वास सहायता उपलब्ध करा रही है।

दिल्ली की इस बैठक का तात्कालिक निष्कर्ष यही है कि तेलंगाना ने अपने सुरक्षा ढांचे और प्रशासनिक क्षमता के विस्तार को लेकर केंद्र से स्पष्ट समर्थन मांगा है। अब नजर इस पर रहेगी कि IPS पदों की संख्या बढ़ाने, 2026 कैडर रिव्यू और पिछड़े क्षेत्रों के लिए वित्तीय मदद पर केंद्र स्तर पर आगे क्या निर्णय होता है।

Banshika Sharma
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कंटेंट राइटर

मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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