
Power Cut In Summer: इस साल गर्मी का मौसम लंबा होने की संभावना है। देश में बिजली कटौती को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सभी गैस आधारित बिजली संयंत्रों (Gas Based Power Plants) को 1 मई से 30 जून तक अधिकतम बिजली उत्पादन करने का निर्देश जारी किया गया है। यह निर्देश बिजली अधिनियम 2003 की धारा 11 के तहत दिए गए हैं।
बिजली मंत्रालय ने इंडिया गैस आधारित उत्पादन स्टेशनों को जारी किया निर्देश
बिजली मंत्रालय के निर्देशनुसार ग्रिड इंडिया गैस आधारित उत्पादन स्टेशनों को पहले से सूचित करेगा कि बिजली की जरूरत कितने दिनों के लिए है। वितरण लाइसेंसधारकों के साथ बिजली खरीद समझौते (PPA) रखने वाले जीबीएसपहले पीपीए धारकों को अपनी पेश की पेशकश करेंगे। पीपीए फ्री गैस आधारित बिजली संयंत्रों को इलेक्ट्रिसिटी मार्केट में आने उत्पादन को पेश करना होगा। बता दें कि इस निर्देश के कार्यन्वयन के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन भी किया गया है।
इस साल कितनी होगी बिजली की मांग?
बता दें कि बिजली मंत्रालय के मुताबिक इस साल बिजली की मांग बढ़ सकती है। डिमांड अधिकतम 260 गीगावॉट होने का अंदाजा लगाया गया है। सितंबर 2023 में बिजली की अधिकतम मांग 243 गीगावॉट तक पहुँच चुकी थी, जो सरकार के अनुमान से काफी अधिक थी।
बिजली की मांग पूरी करने के लिए सरकार ने उठायें ये कदम
देशभर में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए सरकार कई कदम उठाए हैं। जिसमें से एक गैस आधारित बिजली संयंत्रों द्वारा बिजली उत्पादन है। इसके अलावा बिजली संयंत्रों के नियोजित रखरखाव को मानसून में स्थानंतरित करना, नई क्षमता वृद्धि में तेजी लाना, जल विद्युत उत्पादन को पीक आवर्ष में स्थानंतरित करना इत्यादि उपाय भी सरकार ने किए हैं।तापीय विद्युत संयंत्रों की आंशिक कटौती को भी कम किया जाएगा। कैप्टिव उत्पादन स्टेशनों के साथ अधिशेष बिजली का उपयोग किया जाएगा। आयातित कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को पूरी क्षमता के साथ उपलब्ध कराने के लिए उपयोग में लाया जाएगा। अतिरिक्त बिजली को एनर्जी एक्सचेंज में बिक्री के लिए पेश किया जाएगा। इतना ही नहीं कोयले की उपलब्ध सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों द्वारा अग्रिम योजना भी बनाई गई है।

