
Employees Teacher Honorarium Hike: उत्तर प्रदेश के शिक्षा मित्रों-कर्मियों के लिए अच्छी खबर है। जल्द मानदेय में वृद्धि होने वाली है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार को निर्देश दिया है कि वह शिक्षा मित्रों को सम्मानजनक और आजीविका के लिए आवश्यक मानदेय का भुगतान करें, इसके लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर मानदेय वृद्धि पर निर्णय लिया जाए।यह आदेश जितेंद्र कुमार भारतीय और दर्जनों शिक्षा मित्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने दिया है।
4 हफ्तों में समिति बनाकर निर्णय लें सरकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों के मानदेय बढ़ाने पर विचार कर निर्णय लेने के लिए राज्य सरकार को चार हफ्ते में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि कमेटी अगले तीन माह में सहानुभूतिपूर्वक सभी पहलुओ पर विचार कर नियमानुसार शिक्षामित्रों के मानदेय बढ़ाने पर उचित निर्णय लेगी। हालांकि, कोर्ट ने समान कार्य समान वेतन की मांग मानने से इन्कार कर दिया है। समान कार्य समान वेतन का लाभ दिया जाने का फैसला करना विशेषज्ञ प्राधिकारी या विशेषज्ञ समिति का काम है ना की कोर्ट का, इसलिए याचियों को राज्य सरकार से संपर्क करना चाहिए।
समान कार्य समान वेतन पर इंकार
याचियों की ओर से पक्ष रख रहे अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी और अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी का कहना था कि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 1998 में जारी शासनादेश के तहत प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा मित्रों की 1 वर्ष की अवधि के लिए संविदा के आधार पर नियुक्ति की गई, जिसे प्रत्येक वर्ष रिन्यू किया जाता है, शिक्षामित्र विभिन्न स्कूलों में पिछले 18 वर्षों से सहायक अध्यापक की तरह पढ़ा रहे हैं ,ऐसे में 10 हजार मानदेय कम है। उन्होंने समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत पर शिक्षामित्र को सहायक अध्यापकों के समान वेतन दिए जाने या कम से कम न्यूनतम वेतन मान दिए जाने की मांग की , जिस पर राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि याचीगण संविदा पर कार्यरत हैं और सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे लोगों को समान कार्य समान वेतन देने से अपने फैसलों में इन्कार किया है।
मंत्री ने विधान परिषद में दिए थे मानदेय बढ़ाने के संकेत
गौरतलब है कि बीते महीनों विधान परिषद में सपा के एमएलसी मान सिंह यादव ने पूछा था कि शिक्षामित्रों के मानदेय मामले में साल 2018 में हाई पावर कमेटी बनाई गई थी, उसका क्या हुआ? बीजेपी सरकार के कार्यकाल में मानदेय की राशि 10000 कर दी गई थी, जबकि सपा सरकार में समान कार्य के लिए समान वेतन के आधार पर सहायक शिक्षक के बराबर शिक्षामित्रों का मानदेय 40000 रुपये कर दिया गया था।इस पर बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह ने कहा था कि राज्य सरकार शिक्षा मित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी की मांग पर विचार करेगी, इससे जुड़े जो भी फैसले लिए जाएंगे। 15 हजार शिक्षामित्रों को छोड़कर शेष को रिवर्ट कर दिया, जिससे मानदेय पुरानी स्थिति में पहुंच गया।
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