सीएम ममता बनर्जी ने ‘बुलडोजर राजनीति’ को ठुकराया, प्यार और शांति में जताया विश्वास, चुनावी रैली में भाजपा और चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावी रैली में भाजपा और योगी आदित्यनाथ पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने बुलडोजर की राजनीति को नकारते हुए प्यार और सद्भाव में विश्वास जताया, साथ ही चुनाव आयोग पर नामांकन जांच के दौरान चार घंटे तक परेशान करने का गंभीर आरोप भी लगाया। ममता बनर्जी ने इस बार विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के 226 से अधिक सीटें जीतने का भरोसा जताया है।
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पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल अपने चरम पर पहुँच गई है। हर राजनीतिक दल चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है, और इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा और तीखा हमला बोला है। बीरभूम जिले के सूरी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह बुलडोजर की राजनीति में बिल्कुल विश्वास नहीं रखतीं। उनका मानना है कि शासन प्रेम और सौहार्द के सिद्धांतों पर चलना चाहिए, न कि बल प्रयोग और ध्रुवीकरण पर। मुख्यमंत्री ने योगी आदित्यनाथ का नाम लिए बिना यह बात कही, लेकिन उनका निशाना स्पष्ट था। उन्होंने अपनी रैली में कहा, “कल किसी ने यहां आकर उत्तर प्रदेश की तरह बुलडोजर चलाने की बात कही थी, लेकिन मैं साफ कर देना चाहती हूँ कि मैं नफरत या बुलडोजर में नहीं, बल्कि प्यार के सिद्धांत में विश्वास करती हूँ।” ममता बनर्जी का यह बयान भाजपा की आक्रामक चुनावी रणनीति का सीधा जवाब माना जा रहा है।

दरअसल, मुख्यमंत्री बनर्जी का यह वक्तव्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान के सीधे जवाब में आया है। योगी आदित्यनाथ ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के शासन को खत्म करने के लिए ‘यूपी मॉडल’ अपनाने की बात कही थी। भाजपा इस ‘यूपी मॉडल’ को कानून-व्यवस्था और अपराधियों पर लगाम लगाने के एक सफल तरीके के रूप में पेश करती रही है, जिसमें अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई भी शामिल है। इसी पृष्ठभूमि में, ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में इस ‘बुलडोजर राजनीति’ का जिक्र कर यह संदेश देने की कोशिश की कि बंगाल की राजनीति, संस्कृति और शासन करने का तरीका उत्तर प्रदेश से भिन्न है। उन्होंने जोर दिया कि बंगाल की जनता शांति, सद्भाव और प्यार में विश्वास रखती है, न कि किसी भी प्रकार की दमनकारी या आक्रामक राजनीति में। यह बयान विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्रियों के बीच विचारों की सीधी टक्कर को दर्शाता है।

ममता बनर्जी ने भाजपा और चुनाव आयोग पर लगाए आरोप

अपनी चुनावी रैली के दौरान, ममता बनर्जी ने सिर्फ भाजपा को ही नहीं घेरा, बल्कि चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि नामांकन की जांच प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग ने उन्हें जानबूझकर चार घंटे तक परेशान किया। मुख्यमंत्री ने इस घटना पर अपनी कड़ी आपत्ति और नाराजगी व्यक्त की। ममता बनर्जी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वह इस बात को इतनी आसानी से भूलने वाली नहीं हैं और इस मामले को उसके तार्किक अंजाम तक पहुंचाएंगी। मुख्यमंत्री के ये आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं, जब चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए विशेष सक्रियता दिखा रहा है, और यह राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का एक नया दौर शुरू कर सकते हैं। यह घटना चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती है, खासकर जब राज्य की निवर्तमान मुख्यमंत्री स्वयं इस तरह के आरोप लगा रही हों।

ममता बनर्जी ने इस रैली में केंद्र सरकार और भाजपा पर उन्हें लगातार निशाना बनाने का आरोप भी दोहराया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और देश के 19 राज्यों की सरकारें मिलकर उन्हें घेरने और राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। इसके बावजूद, मुख्यमंत्री ने दृढ़ता दिखाते हुए कहा कि वह आम जनता के हक और अधिकारों के लिए अकेले ही लड़ाई लड़ रही हैं। उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए यह भी दावा किया कि भाजपा दिल्ली से सुरक्षा बल लाकर पश्चिम बंगाल का आगामी चुनाव कभी नहीं जीत पाएगी। ममता बनर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों का मनोबल बढ़ाते हुए एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि इस बार के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस 226 से भी ज्यादा सीटें जीतकर एक बार फिर भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी। यह आंकड़ा उनके आत्मविश्वास और राज्य में अपने जनाधार पर उनकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है, साथ ही भाजपा के लिए एक सीधी चुनौती भी पेश करता है।

ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम ‘मन की बात’ की भी कड़ी आलोचना की

भाजपा पर बाहरी लोगों को चुनाव प्रचार के लिए पश्चिम बंगाल में लाने का आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा ट्रेन और बसों के जरिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटा रही है। उन्होंने इस संदर्भ में गृह मंत्री अमित शाह के इलाके का जिक्र करते हुए कटाक्ष किया कि ‘मोटाभाई’ के यहां से भी लोग लाए जा रहे हैं। यह आरोप भाजपा की चुनावी रैलियों में दिखने वाली भीड़ की प्रामाणिकता पर सीधा सवाल उठाता है। मुख्यमंत्री ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भाजपा पिछले 12 सालों से उन्हें लगातार परेशान कर रही है और अब ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम के नाम पर बच्चों के दिमाग को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जो कि एक गलत और अनैतिक तरीका है। ममता बनर्जी ने इन आरोपों के माध्यम से भाजपा की चुनावी रणनीति और उसके प्रचार के तरीकों पर सीधा हमला बोला है, जिससे चुनाव का माहौल और गरमा गया है।

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए मतदान दो चरणों में संपन्न होगा। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को निर्धारित है, जबकि दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा। इन दोनों महत्वपूर्ण चरणों के बाद, पूरे राज्य की निगाहें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी होंगी। 4 मई को ही यह तय हो पाएगा कि ममता बनर्जी का 226 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कितना सफल होता है और पश्चिम बंगाल की सत्ता की बागडोर अगले पांच साल के लिए किसके हाथों में जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव राज्य के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा, क्योंकि यह तय करेगा कि राज्य की मौजूदा राजनीतिक दिशा जारी रहती है या कोई बड़ा बदलाव आता है।

Shyam Dwivedi
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Shyam Dwivedi

7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi →
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