5.51 लाख रुपये के नोटों से सजा मालवा की वैष्णोदेवी मां भादवामाता का दरबार, दीपावली पर हुआ अद्भुत श्रृंगार

मालवा की वैष्णोदेवी के नाम से प्रसिद्ध आरोग्य तीर्थ में अनूठी सजावट बनी आकर्षण का केंद्र, पुजारी अर्जुन और जगदीश चौहान ने परिवार सहित संभाली श्रृंगार की जिम्मेदारी
Maa Bhadwamata Vaishno Devi Malwa decorated 5.51 lakh Rupees

Maa Bhadwamata Vaishno Devi Malwa decorated 5.51 lakh Rupees

नीमच जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर नीमच-मनासा मार्ग पर स्थित मालवा की वैष्णोदेवी के नाम से प्रसिद्ध आरोग्य तीर्थ महामाया भादवामाता मंदिर में दीपावली के अवसर पर माता रानी का ऐसा भव्य और अनूठा श्रृंगार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को आकर्षित कर लिया। माता का पूरा दरबार 5 लाख 51 हजार रुपए के नए नोटों से सजाया गया।

रंग-बिरंगे नोटों से तैयार आकर्षक लड़ियों और कलात्मक सजावट के बीच माता रानी का दिव्य स्वरूप देखते ही बन रहा था। दीपोत्सव पर आस्था, भक्ति और आकर्षक सजावट का यह संगम मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बना रहा।

नोटों की मालाओं से किया मातारानी का अद्भुत श्रृंगार 

इस विशेष श्रृंगार में 10, 20, 50, 100, 200 और 500 रुपए के नए नोटों का इस्तेमाल किया गया। अलग-अलग मूल्यवर्ग के नोटों को बेहद आकर्षक तरीके से सजाकर माता के दरबार को भव्य रूप दिया गया। नोटों से तैयार की गई लड़ियां और विभिन्न कलाकृतियां मंदिर की सजावट में चार चांद लगा रही थीं। माता रानी के दरबार की यह सजावट श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

मंदिर के पुजारी ने परिवार के साथ मिलकर किया श्रृंगार 

दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु माता के इस अनूठे स्वरूप को निहारते रहे और मोबाइल कैमरों में इस विशेष श्रृंगार को कैद करते नजर आए। माता के इस विशेष श्रृंगार की पूरी जिम्मेदारी मंदिर के पुजारी अर्जुन चौहान एवं जगदीश चौहान ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर निभाई। उन्होंने पूरे दरबार को आकर्षक रूप देने में विशेष मेहनत की।

वहीं, माता रानी को चोला चढ़ाने के लाभार्थी अलग रहे, जिन्होंने अपना नाम सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। दीपावली के पावन अवसर पर सजे माता रानी के इस भव्य दरबार ने भादवामाता मंदिर की धार्मिक आभा को और बढ़ा दिया। श्रद्धालुओं के लिए यह श्रृंगार माता के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण का अनूठा प्रतीक बना।

कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट 

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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