
Raksha Bandhan 2023 : हिंदू धर्म में रक्षाबंधन का पर्व भारत में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। भाई-बहन के प्रेम और बंधन का यह पर्व सावन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जिसे ‘राखी पूर्णिमा’ भी कहा जाता है जो कि आमतौर पर जुलाई या अगस्त महीने में पड़ता है।रक्षाबंधन के दिन बहनें सुबह उठकर सज-धजकर तैयारी हो जाती हैं। इसके साथ ही, भाई के लिए राखी का थाल तैयार करती है, जिसमें रंग-बिरंगे धागे से बना रक्षा सूत्र, चावल, रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और पानी शामिल है। आइए विस्तार से बताते हैं तीथि, शास्त्रों में बताए गए नियम, शुभ मुहूर्त आदि…

शुभ तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष की श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त 2023 को सुबह 11 बजे से शुरू होकर 31 अगस्त को सुबह 07:07 मिनट पर समाप्त होगी। जिस कारण रक्षाबंधन का पर्व 2 दिन मनाया जाएगा। इस साल रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया होने के कारण इसके लगने से पहले राखी बांधी जा सकती है और श्रावण पूर्णिमा के बाद भी राखी बांधी जा सकती है।
शुभ मुहूर्त
हिंदी पंचांग के अनुसार, 30 अगस्त को सुबह 10 बजकर 58 मिनट से भद्रा लग जाएगी और यह रात को 09 बजकर 01 मिनट तक रहेगी। इस दौरान राखी नहीं बांधी जा सकती। वहीं, श्रावण पूर्णिमा यानि 31 अगस्त को सुबह 07 बजकर 07 मिनट पर खत्म हो जाएगी। इस तरह से 30 अगस्त को सुबह भद्रा के लगने से पहले राखी बांधी जा सकती है और 31 अगस्त को सुबह 07 बजकर 07 मिनट से पहले राखी बांध सकते हैं।
- रक्षाबंधन भद्रा पूंछ: 30 अगस्त 2023 की शाम 05:30 बजे से 06:31 बजे तक
- रक्षाबंधन भद्रा मुख: 30 अगस्त 2023 की शाम 06:31 बजे से रात 08:11 बजे तक
- रक्षाबंधन भद्रा समाप्ति समय: 30 अगस्त 2023 की रात 09 बजकर 03 मिनट पर
इन बातों का रखें ध्यान
- राखी बांधने से पहले भाई-बहन दोनों को स्नान करना चाहिए और पवित्र भावना के साथ तैयार होना चाहिए।
- सबसे पहले भाई को तिलक लगाना चाहिए, जिससे रक्षाबंधन का आरंभ हो।
- राखी बांधने से पहले भाई को सबसे पहले राखी बांधनी चाहिए। इसके बाद, अन्य आदरणीय परिवार के सदस्यों को राखी बांधनी चाहिए।
- राखी बांधते समय भाई-बहन एक-दूसरे को प्रेम और शुभकामनाएं देने का समय होता है।
- राखी बांधने से पहले, भाई-बहन दोनों को अपने मन और आत्मा से इस सम्मान के पर्व को मनाने का संकल्प लें।
- राखी बांधते समय एक छोटी सी श्रीफली देना चाहिए।
- राखी को सटीकता और कौशल से बांधने का प्रयास करें, ताकि वह सुरक्षित रहे और राखी नहीं टूटे।
- राखी बांधते समय प्रेम और आदर के साथ यह स्नेहपूर्ण मोमेंट बिताएं, जिससे आपके भाई-बहन के बीच और भी मजबूत बंधन बन सकें।
इस दिशा में बांधे राखी
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राखी बांधते समय भाई का चेहरा उत्तर-पूर्व दिशा में होनी चाहिए और बहन का चेहरा दक्षिण-पश्चिम की दिशा में होना चाहिए। गलती से भी भूलकर उत्तर-पश्चिम दिशा में ना बैठे वरना भाई पर बड़ी विपदा आ सकती है।
(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।)
सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

