कुछ घंटे की बारिश से तहसील कार्यालय जलमग्न, तहसीलदार ने खुले आसमान के नीचे ली पटवारियों की क्लास

कुछ घंटे की बारिश से तहसील कार्यालय जलमग्न, तहसीलदार ने खुले आसमान के नीचे ली पटवारियों की क्लास

सतना| पुष्पराज सिंह बघेल| थोड़ी बारिश क्या हुई सरकारी इंतजामों की पोल खुल गयी| मध्य प्रदेश के सतना जिले की कोठी तहसील में कुछ ऐसा ही नजारा था, जहाँ कुछ घंटे की बारिश से तहसील कार्यालय जलमग्न हो गया | नतीजा तहसीलदार साहब ने खुले आसमान के नीचे दफ्तर खोल दिया और पटवारियों की बैठक ली।

सरकारी इंताजम के चलते तेज बारिश से उपार्जन केंद्रों में रखा किसान का अनाज पहले ही बली चढ़ चुका है | अब सरकारी दफ्तरों में रखी फाइलें भी सुरक्षित नही है। जी हाँ सतना जिले की कोठी तहसील कार्यलय का हाल कुछ ऐसी ही कहानी बयाँ कर रहा है जहां आज कुछ घंटे की बारिश से तहसील कार्यालय जलमग्न हो गया | कार्यालय के अंदर दो फिट तक जल भराव रहा कुर्सी टेबल डूबी नजर आयी, दफ्तर का कर्मचारी फाइलों को जैसे तैसे सुरक्षित करता नजर आया।

तहसील कार्यालय आने वाले आवेदक , अनावेदक जल भराव के चलते कार्यलय आये और फिर वापस लौट गए। तहसीलदार ने भी अपनी बैठक खुले आसमान के नीचे लगा ली और पटवारियों की क्लास ली। तहसीलदार भी कार्यालय में जल भराव पर ज्यादा कुछ नही बोल सके बस इतना हो बोले कि पटवारियों के साथ जगह पर्यप्त नही थी इसलिए वैकल्पिक व्यस्था की गई है। जनाब ये कहने से कतरा रहे थे कि तहसील कार्यालय में जल भराव है और कार्यालय में अंदर नही जाया जा सकता। तहसील कार्यालय के अंदर हुए जल भराव ने हर बार की तरह इस बार भी सरकारी निर्माण कार्यो को कठघरे में खड़ा कर दिया है। कमीशन की भेंट चढ़े निर्माण ने आज अधिकारी को खुले में बैठने को मजबूर कर दिया है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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