
भारत में आए दिन किसी न किसी खिलाड़ी का डेब्यू होता रहता है। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी सीरीज या एशिया कप जैसे टूर्नामेंट में भारत के लिए कई खिलाड़ियों ने डेब्यू किया और खूब धमाल मचाया। इस समय भारतीय टीम में ऐसे युवा खिलाड़ी शामिल हैं जो थोड़े ही समय में मैच को पलटने की ताकत रखते हैं। चाहे शुभमन गिल हों या अभिषेक शर्मा, भारत के युवा खिलाड़ियों ने क्रिकेट के बड़े-बड़े दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। इसके कारण उन्हें भारत की कंसिस्टेंट प्लेइंग 11 में जगह मिली।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ ऐसे क्रिकेटर भी रहे हैं जिन्होंने भारत के लिए डेब्यू तो किया, लेकिन एक मैच खेलने के बाद ही उनका क्रिकेट करियर खत्म हो गया। चलिए आज हम आपको ऐसे खिलाड़ियों के बारे में बताते हैं।
श्यूट बनर्जी
इस लिस्ट में पहला नाम श्यूट बनर्जी का है। श्यूट बनर्जी ने 1991 में भारत के लिए डेब्यू किया था। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में एक टेस्ट मैच खेला था, लेकिन इस टेस्ट मैच के बाद ही उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया और फिर कभी भारतीय टीम में नहीं चुना गया। अपने डेब्यू मैच में उन्होंने पहली पारी में एक और दूसरी पारी में चार विकेट हासिल किए थे, लेकिन उम्र के कारण उन्हें भारत की ओर से दोबारा मौका नहीं मिला। श्यूट बनर्जी का फर्स्ट क्लास करियर बेहतरीन रहा। उन्होंने 138 मैच खेले और 385 विकेट झटके, जबकि बल्लेबाजी में 20.63 की औसत से 3715 रन भी बनाए।
फैज़ल फज़ल का नाम
वहीं इस लिस्ट में फैज़ल फज़ल का नाम भी शामिल है। फैज़ल फज़ल ने 2016 में जिम्बाब्वे के खिलाफ भारतीय टीम में डेब्यू किया था। उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ अपना एकमात्र इंटरनेशनल मुकाबला खेला था। हालांकि उनके बारे में बेहद कम लोग जानते हैं। बता दें कि उन्होंने अपने डेब्यू मैच में ही 55 रनों की नाबाद पारी खेली थी, लेकिन उन्हें दोबारा भारतीय टीम में मौका नहीं मिला, जिसके चलते उनका करियर थम गया। फैज़ल 2010 की शुरुआत में राजस्थान रॉयल्स के प्रमुख खिलाड़ियों में से एक माने जाते थे।
पवन नेगी का नाम
वहीं तीसरे खिलाड़ी के तौर पर पवन नेगी का नाम आता है। पवन नेगी ने भी भारतीय टीम के लिए केवल एक ही मुकाबला खेला और उनका करियर वहीं थम गया। उन्होंने 2016 में एशिया कप के दौरान 3 मार्च को संयुक्त अरब अमीरात के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने तीन ओवर में मात्र 16 रन देकर एक विकेट लिया था, लेकिन उन्हें फिर कभी भारतीय टीम में मौका नहीं मिला। दरअसल, पवन नेगी का कंपटीशन बहुत ज्यादा था। उस दौरान टीम में रविंद्र जडेजा, रविचंद्रन अश्विन और अमित मिश्रा जैसे खिलाड़ियों का बोलबाला था।
4 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

