महाकाल की नगरी में कोरोना से मृत्यु दर के भयावह आंकड़ें, अब तक 40 की जान गई

महाकाल की नगरी में कोरोना से मृत्यु दर के भयावह आंकड़ें, अब तक 40 की जान गई

उज्जैन

बुधवार को उज्जैन में 11 नए पॉजिटिव केस मिलने से हड़कंप मच गया है। इन्हें मिलाकर अब जिले में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 198 पहुंच गई है, जिनमें से 40 की मौत हो चुकी है। एक दिन पहले मंगलवार को भी यहां 11 नए केस मिलने और 5 की मौत की पुष्टि हुई थी। इस बीच थोड़ी राहत वाली खबर ये है कि मंगलवार को ही 30 मरीज स्वस्थ होकर अपने घर लौटे और जिले में कोरोना को मात देने वाली की तादाद 53 हो गई है।

उज्जैन के आंकड़े डराने वाले हैं, यहां मृत्युदर प्रदेश के अन्य जिलों में सबसे ज्यादा और देश के कई राज्यों से भी अधिक है। महाकाल की नगरी में जहां माना जाता है कि महाकालेश्वर की असीम कृपा है, ये आंकड़े बेहद भयावह है। फिलहाल पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य अमला लगातार कोशिश कर रहा है कि मरीजों को सही इलाज मिले और इसके लिये आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज और पीटीएस पुलिस प्रशिक्षण स्कूल में जांच और इलाज जारी है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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