
इस बार दीपावली के दौरान तिथियों में घट बढ़ हो रही है। इस वजह से रूप चौदस यानी नरक चतुर्दशी का पर्व 7 और 8 नवंबर 2 दिन मनाया जाएगा। दीपावली के पर्व के साथ उज्जैन स्थिति बाबा महाकाल को दिनचर्या में भी परिवर्तन देखने को मिलता है।
श्री महाकालेश्वर मंदिर में 27 अक्टूबर से आरती के समय में परिवर्तन किया जा चुका है। वहीं अब रूप चौदस से बाबा महाकाल गर्म जल से स्नान करेंगे। 8 नवंबर को मंदिर में सुबह रूप चौदस और शाम को दिवाली मनाई जाने वाली है। नरक चतुर्दशी का दिन मंदिर में खास इसलिए होता है क्योंकि इस दिन बाबा महाकाल को सुगंधित उबटन पुजारी परिवार की महिलाओं द्वारा लगाया जाता है।
बाबा महाकाल को लगेगा उबटन
नरक चतुर्दशी के दिन बाबा महाकाल को भस्म आरती में पंचामृत स्नान कराया जाएगा। इसके बाद चंदन, केसर, इत्र, सफेद तिल और खस से तैयार खास उबटन लगाया जाएगा। जिस तरह से रूप चौदस पर रूप निखरने की परंपरा है उसे मंदिर में भी निभाया जाता है। इसके बाद अन्नकूट का भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद कर्पूर आरती होती है, जिसे महिलाएं ही करती हैं।
शुरू होगा गर्म जल से स्नान
रूप चौदस पर निभाई जाने वाली इस परंपरा के साथ बाबा महाकाल की दिनचर्या में एक ओर परिवर्तन आ जाता है। इस दिन से वो गर्म जल से स्नान करते हैं। दरअसल, कार्तिक मास की चौदस से ठंड की शुरुआत मानी जाती है। बाबा को ठंड ना लगे इसलिए उन्हें गर्म जल से स्नान कराया जाता है। इसके बाद शिवरात्रि तक प्रतिदिन गर्म जल से स्नान होता है।
साल में एक बार उबटन लगाती हैं महिलाएं
इस दिन बाबा महाकाल को उबटन लगाने की जो परंपरा है। उसे साल में एक बार निभाया जाता है। पुजारी और पुरोहित परिवार की महिलाएं साल में एक दिन बाबा को भस्म आरती में उबटन लगाती हैं। सुगंधित द्रव्यों से तैयार इस उबटन को लगाने के साथ विशेष श्रृंगार भी किया जाता है। ये क्षण काफी आनंददायक होता है।
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