
सिंहस्थ 2028 में लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। इन श्रद्धालुओं के सुविधा के लिए प्रशासन वृहद स्तर पर तैयारी कर रहा है। इस दौरान लगभग 13 अखाड़े उनसे जुड़े महामंडलेश्वर, संत, महंत और वीआईपी सहित आम लोगों का मूवमेंट लगातार रहने वाला है। ऐसे में पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से एक नया तरीका निकाला है।
भीड़भाड़ का फायदा उठाकर किसी वारदात को अंजाम देने वाले अपराधी पीछे नहीं हटते हैं। ऐसे में इन संदिग्धों की पहचान के लिए पुलिस अब एआई का सहारा लेने जा रही है। चलिए जान लेते हैं कि आखिरकार किस तरह से तैयारी की जा रही है।
मेला क्षेत्र में हजारों पुलिसकर्मी
सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए मेला क्षेत्र में 52000 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। लगभग 3500 सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल होंगे। इसके अलावा 40 ड्रोन, 35 अंडर वाटर कैमरा की मदद ली जाएगी। पीआईएफ और सिमी सहित देश भर के अपराधियों की फोटो और डिटेल अपलोड किए गए हैं। इन्हें पकड़ने के लिए फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक का इस्तेमाल होगा।
सिंहस्थ में होगा एआई का उपयोग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हुए रियल टाइम भीड़ का अनुमान लगाया जाएगा। इसे यह पता चलेगा कि घाट पर पर्व स्नान के दिन किस समय कितने यात्री रहेंगे। इससे भीड़ को नियंत्रित किया जा सकेगा। इसी तरह से जितने भी पुल और रास्ते वन वे रहेंगे। वहां अगर दूसरी तरफ से प्रवेश किया जाएगा तो अलार्म कॉल के जरिए सूचना मिलेगी और उन्हें रोका जाएगा।
आने जाने वाले वाहनों पर नजर रखी जाएगी और अगर गलत नंबर प्लेट की शंका होती है तो आरटीओ की मदद से डिटेक्ट किया जाए। 2700 पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम लगाए जाएंगे। यह तीन स्तर पर होंगे पहला एक से एक को सूचना। दूसरा एक से कई लोगों को और तीसरा एक से सभी लोगों को सूचना पहुंचेगी। स्टेशनों पर लगे कैमरे से यह देखा जाएगा कि अन्य शहरों से कितनी ट्रेन में कितने यात्री उज्जैन पहुंच रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें रास्ते में रोका जा सके।
सोशल मीडिया पर नजर
सोशल मीडिया पर पैनी नजर रखी जाएगी ताकि किसी भी तरह की अफवाह ना फैले। किसी भी अफवाह संबंधी फोटो वीडियो को अपलोड कर एआई की मदद से सच्चाई पता की जाएगी। फेक निकलने पर इन्हें सार्वजनिक कर जानकारी दी जाएगी।
10 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में.

