आजम खान और उनके बेटे को 7-7 साल की सजा, रामपुर की अदालत ने दो पैन कार्ड मामले में सुनाया फैसला

खास बात ये है कि आजम खान 23 सितंबर 2025 को यानि करीब 2 महीने पहले ही सीतापुर जेल से रिहा हुए थे। जबकि उनके बेटे अब्दुल्ला 9 महीने पहले हरदोई जेल से रिहा हुए थे। अब रामपुर की अदालत के फैसले के बाद दोनों फिर से जेल जाएंगे।
Azam Khan and son Abdullah Azam

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ और दबंग नेता आजम खान एक बार चर्चा में हैं, दो महीने पहले जेल से छूटकर आये आजम खान को एक बार फिर जेल में जाना होगा, इस बार उनके साथ उनका बेटा अब्दुल्ला भी होगा। रामपुर की अदालत ने आज सोमवार को पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के दो पैन कार्ड मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दोषी करार देते हुए सात-सात जेल की सजा सुनाई है । साथ ही 50-50 हजार का जुर्माना भी लगाया है।

अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद  पुलिस ने दोनों नेताओं को कस्‍टडी में ले लिया। फैसले की सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।  उल्लेखनीय है कि अदालत अब तक 11 मामलों में फैसले सुना चुकी हैं जिनमें से 6 मामलों में आजम खान को सजा हो चुकी है पांच में वे बरी हो चुके हैं, उनके खिलाफ कुल 104 मुक़दमे दर्ज हैं।

भाजपा विधायक ने दर्ज कराया है मुकदमा

आजम खान और उनके बेटे पर फर्जी पैन कार्ड यानि दो पैन कार्ड का मुकदमा रामपुर भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने दर्ज कराया था, आज सुनवाई के दौरान वे भी अदालत में मौजूद थे।मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी जिससे किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। सुनवाई के वक्त कोर्ट परिसर में आजम खान समर्थक सपा नेता और उनके परिजन भारी संख्या में मौजूद थे ।

अब्‍दुल्‍ला आजम पर ये हैं आरोप

गौरतलब है कि पूर्व विधायक एवं आजम खान के  बेटे अब्‍दुल्‍ला आजम पर आरोप है कि उन्‍होंने चुनाव लड़ने की न्‍यूनतम आयु पूरी न होने के बावजूद विधायक बनने के लिए फर्जीवाड़ा किया। अपनी उम्र अधिक दिखाने के लिए उन्‍होंने दूसरा पैन कार्ड बनवाया। इस मामले में उनके पिता आजम खान पर भी इसके लिए साजिश रचने का आरोप लगा है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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