
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को कहा कि लोकतंत्र को बचाने का ‘ऐतिहासिक’ दायित्व वर्तमान में भारत निर्वाचन आयोग के कंधों पर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आयोग का एक ‘सही और साहसिक कदम’ देश की भावी पीढ़ियों के भविष्य और कल्याण को सुनिश्चित कर सकता है। यादव ने अपने बयान में कहा कि जब आयोग सही रास्ते पर चलेगा, तो करोड़ों भारतवासियों का समर्थन उसका रक्षा कवच बन जाएगा।
यादव ने निर्वाचन आयोग से न केवल सुधार, बल्कि आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि आयोग पर कई प्रकार के अवांछित दबाव हो सकते हैं, लेकिन वह अकेला नहीं है। उन्होंने कहा, “सत्य के मार्ग पर चलने वालों के साथ जनता और जनविश्वास स्वयं खड़ा हो जाता है।” यादव ने आयोग से अंतरात्मा की आवाज सुनने और साहसिक कदम उठाने की अपील की, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हो सके।
18,000 शपथ पत्रों का जिक्र
उन्होंने समाजवादी पार्टी द्वारा निर्वाचन आयोग को सौंपे गए 18,000 शपथ पत्रों का जिक्र किया, जिनमें कथित तौर पर ‘वोट की डकैती’ के मामले उठाए गए थे। यादव ने आरोप लगाया कि इन शपथ पत्रों पर आयोग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि गलत कार्यों और कारनामों की एक लंबी फेहरिस्त बनती जा रही है, लेकिन न तो इनका कोई जवाब मिला है और न ही उनके हलफनामों पर कोई प्रतिक्रिया दी गई।
निर्वाचन आयोग से स्वतंत्र और निष्पक्ष काम करने की अपेक्षा
अखिलेश यादव ने अपने बयान में निर्वाचन आयोग से स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करने की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि आयोग के पास लोकतंत्र को मजबूत करने और जनता के विश्वास को बहाल करने का सुनहरा अवसर है। सपा अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या पक्षपात लोकतंत्र के लिए हानिकारक हो सकता है, और आयोग को इस दिशा में सजग रहना होगा।
