77वें गणतंत्र दिवस पर काशी विश्वनाथ धाम में शिवभक्ति के साथ देशभक्ति का भी नजारा, तिरंगे के रंगों वाले फूलों से हुआ शिवलिंग का श्रृंगार

गणतंत्र दिवस की सुबह काशी में कुछ अलग रंग लेकर आई। काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में जब बाबा विश्वनाथ का ज्योतिर्लिंग तिरंगे रंगों के फूलों से सजा तो ऐसा लगा मानों आस्था ने राष्ट्रप्रेम का रूप धर लिया हो। मंगला आरती के साथ उठती धूप, पुष्पों की सुगंध और “हर-हर महादेव” के जयकारों के बीच देशभक्ति के नारे भी गूंजते रहे।
Kashi Vishwanath Dham

Kashi Vishwanath Dham

हम आज अपना 77वें गणतंत्र दिवस को पूरे उत्साह और गर्व के साथ मना रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर वाराणसी में स्थित श्री काशी विश्वनाथ धाम में आध्यात्मिकता के साथ और देशभक्ति की छवि भी देखने को मिली। आज मंदिर के गर्भगृह में ज्योतिर्लिंग का विशेष श्रृंगार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के तीन रंगों केसरिया, सफेद और हरे फूलों के साथ किया गया।

मंगला आरती के समय केसरिया गेंदा, सफेद रजनीगंधा और गुलाब तथा हरे पत्तों-फूलों से सजा शिवलिंग श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। इस दृश्य ने भक्तों के मन में भक्ति के साथ-साथ संविधान और राष्ट्र के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना को भी प्रगाढ़ कर दिया। आज मंदिर परिसर में “हर-हर महादेव” के जयकारों के साथ देशभक्ति के नारे भी गूंजते रहे।

तिरंगे के रंग वाले फूलों से हुआ ज्योतिर्लिंग का श्रृंगार 

आज गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व पर नगर वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में अध्यात्म और राष्ट्रप्रेम का दुर्लभ संगम देखने को मिला। मंदिर के गर्भगृह में विराजमान भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग का विशेष श्रृंगार राष्ट्रीय ध्वज के तीन रंगों केसरिया, सफेद और हरे पुष्पों से किया गया। मंगला आरती के दौरान भक्त ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के साथ ‘भारत माता की जय’ और ‘जय हिंद’ के नारे भी लगा रहे थे। इस तरह मंदिर प्रशासन और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से किया गया यह आयोजन आस्था और राष्ट्रवाद के अद्भुत मेल का प्रतीक बन गया।

अध्यात्म, दर्शन और आस्था का केंद्र

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है जहां भगवान शिव ‘विश्वनाथ’ या ‘विश्वेश्वर’ के रूप में विराजमान हैं। यह मंदिर पवित्र गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है और वाराणसी की प्राचीन गलियों में बसा है। काशी जिसे मोक्षदायिनी नगरी माना जाता है. वहां स्थित यह मंदिर सदियों से अध्यात्म, दर्शन और धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। गंगा के तट पर बसे इस धाम को लेकर मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से आत्मिक शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। यह मंदिर ‘स्वर्ण मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसका गुम्बद और शिखर सोने की परत से चमकते हैं। यहां की नंदी प्रतिमा, गर्भगृह में शिवलिंग और आसपास के अन्य मंदिर जैसे अन्नपूर्णा देवी का मंदिर इसे और भी खास बनाते हैं।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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