
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दो नेताओं, संजीव बालियान और राजीव प्रताप रूडी के बीच कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के चुनाव के बाद शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। क्लब के सचिव-प्रशासन पद के चुनाव में रूडी से हारने वाले पूर्व सांसद संजीव बालियान ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता था कि रूडी इतने बड़े नेता बन गए हैं कि अब वे उत्तर प्रदेश के राजपूतों का भविष्य तय करने लगे हैं। बालियान ने यह भी कहा कि इस मामले में चिंता उत्तर प्रदेश के बड़े नेताओं, जैसे योगी आदित्यनाथ को करनी चाहिए, न कि उन्हें।
रूडी ने चुनाव जीतने के बाद दावा किया था कि बालियान के क्षेत्र में दो लाख राजपूत वोटर हैं, और अगर उनके नाम पर राजपूत नाराज हो गए तो बालियान को नुकसान हो सकता है। इस पर बालियान ने एक इंटरव्यू में जवाब दिया कि रूडी को उनके मित्रों के बारे में बोलने से पहले अपने मित्रों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर रूडी इस विवाद को और खींचते हैं, तो वे भी जवाब देने से पीछे नहीं हटेंगे।
रूडी को विपक्षी नेताओं का भी समर्थन
कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के चुनाव में रूडी को 373 वोट मिले, जबकि बालियान को 291 वोट प्राप्त हुए। रूडी को विपक्षी नेताओं का भी समर्थन मिला, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। बालियान ने राजपूत बनाम जाट की चर्चा को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें यूपी के ज्यादातर राजपूत सांसदों का समर्थन मिला, और जाट नेताओं जैसे अजय चौटाला, दुष्यंत चौटाला और जयंत चौधरी ने वोट नहीं डाला। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर रूडी को ज्यादा वोट मिले, तो क्या वे सभी राजपूत सांसदों के थे।
जातिगत समीकरणों और नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई
यह विवाद कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के 12 अगस्त को हुए चुनाव से शुरू हुआ, जिसमें 669 वोटरों ने हिस्सा लिया था। रूडी की जीत ने उनकी राजनीतिक ताकत को दर्शाया, जबकि बालियान ने इस हार को हल्के में लेते हुए कहा कि उनकी लड़ाई व्यक्तिगत नहीं है, लेकिन रूडी के बयानों ने इसे तूल दे दिया। यह घटनाक्रम उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातिगत समीकरणों और नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई को और उजागर करता है।
