योगी ने सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल के लिए किया भूमिपूजन, AI के बढ़ते उपयोग पर बोले, सतर्क रहें कहीं टेक्नॉलोजी हमें संचालित न करने लग जाये

योगी आदित्यनाथ ने कहा कोई भी देश शक्तिशाली हो, समर्थ हो, आत्मनिर्भर हो, इसकी शुरुआत शिक्षा से होती है। दुनिया के अंदर जब समृद्धि की चर्चा होती है और उनके द्वारा जो पैरामीटर तय होते हैं, उस पैरामीटर में सबसे पहले शिक्षा आती है।
Yogi Adityanath Saraswati Shishu Mandir School Bhoomi Pujan

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज जनपद बस्ती में अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, विद्या भारती के सरस्वती विद्या मंदिर, वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के नवीन प्रकल्प (सरस्वती शिशु मंदिर) के लिए भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा  सरस्वती शिशु मंदिर, बच्चों के अंदर भारत और भारतीयता के प्रति, एक नागरिक के रूप में उन कर्तव्यों का बोध कराने, सुयोग्य नागरिक बनाने हेतु अपने राष्ट्रीय दायित्व का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन कर रहा है। यहां से निकले हुए छात्र आज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में समाज को नेतृत्व देकर प्रधानमंत्री मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ जुड़कर पूरी प्रतिबद्धता के साथ अपना योगदान दे रहे हैं।

योगी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ‘सा विद्या या विमुक्तये’ सूत्र वाक्य का अर्थ बताते हुए कहा विद्या वह है, जो हमारी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर दे, यानि वो हमें आगे बढ़ने के लिए मार्ग प्रशस्त कर दे। उन्होंने कहा हमारा देश 1947 में स्वतंत्र हुआ लेकिन तत्कालीन सरकारों ने भारतीय शिक्षा पद्धति के लिए कुछ विशेष नहीं किया मगर तब आरएसएस प्रचारक नानाजी देशमुख ने गोरखपुर में सरस्वती शिशु मंदिर की पहली शाखा स्थापित की और आज विद्या भारती के अंतर्गत संचालित हजारों शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों को शिक्षा दे रहे हैं।

शिक्षण संस्थान बालक के सर्वांगीण विकास की आधारशिला

भारत की शिक्षा कैसी होनी चाहिए ये तत्कालीन सरकार प्रयास नहीं पाई तो आजादी के पांच साल के ब  गोरखपुर से नानजी देशमुख ने ये शुरुआत की उसके पीछे ध्येय ये था कि भारत और भारतीयता से ओतप्रोत ऐसे शिक्षण संस्थान की स्थापना आवश्यक है जो भारत को भारत के अनुरूप विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने में अपना योगदान दे सकें, उन्होंने कहा शिक्षण संस्थान केवल अक्षर ज्ञान के माध्यम नहीं हैं, वह एक बालक के सर्वांगीण विकास की आधारशिला हैं।

बांटने वाली ताकतें नहीं चाहती कि भारत मजबूत हो

योगी ने कहा ये देश गुलाम इसलिए हुआ क्योंकि हम आपस में बंटे थे , उन्होंने कहा बांटने वाली ताकतें बड़े पैमाने पर हैं जो नहीं चाहती कि भारत मजबूत हो, वे लोग भारत को कमजोर करने के लिए हर प्रकार के षड्यंत्र करते हैं, योगी ने कहा आज का समय सोशल मीडिया का समय है इसका दुरुपयोग और सदुपयोग दोनों हो सकता है, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर किस तरह से समाज में भ्रम फ़ैलाने का प्रयास होता है, जाति को जाति से लड़ाने का प्रयास होता है, फेक एकाउंट बनाकर एक दूसरे को गाली देकर, दिलवाकर आपस में बाँटने का प्रयास हो रहा है।

सोशल मीडिया यूजर्स को योगी की सलाह 

उन्होंने कहा सोशल मीडिया का उपयोग अच्छी चीजों के लिए हो सकता है  अच्छी शिक्षा के लिए किया जा सकता है कोविड में ऑनलाइन क्लासेस इसी पर चलीं पाठ्यक्रम पूरे कराये गए इसका एक पक्ष सकारात्मक है जो अच्छे काम का प्रचार करता है और दूसरा नकारात्मक काम को प्रमोट करता है, योगी ने कहा हम 5-6 घंटे सोशल मीडिया पर देखने में खर्च कर रहे है तो हम अपना समय और श्रम खर्च कर रहे हैं और शरीर के साथ भी धोखा कर रहे है।

योगी आदित्यनाथ ने AI के बढ़ते उपयोग पर किया आगाह 

योगी ने कहा टेक्नॉलोजी आज की जरुरत है लेकिन ध्यान रहे ये टेक्नॉलोजी हमारे द्वारा संचालित हो हम टेक्नॉलोजी के दास न बनें, टेक्नॉलोजी हमें संचालित ना करने लग जाये हमें ये सतर्कता रखनी होगी, उन्होंने कहा जिस तरह आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है वो आने वाले समय ने नई दुविधा पैदा कर सकता है, उन्होंने कहा AI का उपयोग जहाँ आवश्यक हो करना चाहिए लेकिन इसपर निर्भरता परेशानी पैदा कर सकती है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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