देहरादून में बनेगा ‘अग्रेसिव डॉग सेल्टर’, नगर निगम ने बढ़ते डॉग बाइट मामलों पर उठाया कदम

उत्तराखंड में आवारा और पालतू कुत्तों के काटने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी को देखते हुए नगर निगम देहरादून ने एक नई पहल की है। निगम ने ऐसे कुत्तों के लिए एक विशेष ‘अग्रेसिव डॉग सेल्टर’ बनाने का निर्णय लिया है।
देहरादून में बनेगा ‘अग्रेसिव डॉग सेल्टर’, नगर निगम ने बढ़ते डॉग बाइट मामलों पर उठाया कदम

उत्तराखंड में आवारा और पालतू कुत्तों के काटने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस साल अब तक राज्य में करीब 18,000 डॉग बाइट के मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें सबसे ज्यादा घटनाएं राजधानी देहरादून से सामने आई हैं। यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। इसी को देखते हुए नगर निगम देहरादून ने एक नई पहल की है। निगम ने ऐसे कुत्तों के लिए एक विशेष ‘अग्रेसिव डॉग सेल्टर’ बनाने का निर्णय लिया है, जिनका व्यवहार इंसानों के प्रति आक्रामक पाया गया है।

बढ़ते डॉग बाइट मामलों पर उठाया गया बड़ा कदम

नगर निगम ने सेल्टर निर्माण के लिए शंकरपुर क्षेत्र को चुना है। यहां पर्याप्त जगह और व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी ताकि कुत्तों की सुरक्षा और निगरानी ठीक से हो सके। नगर आयुक्त नमामि बंसल ने बताया कि किसी भी डॉग को जांच के बिना सेल्टर में नहीं रखा जाएगा। एक विशेष समिति बनाई गई है जो प्रत्येक डॉग के व्यवहार की जांच करेगी और उसके बाद ही यह तय किया जाएगा कि उसे सेल्टर में भेजा जाए या नहीं। इस पहल का उद्देश्य सार्वजनिक सुरक्षा के साथ-साथ पशु कल्याण के संतुलन को बनाए रखना है।

कुत्तों को दी जाएंगी सभी सुविधाएं

सेल्टर में रखे जाने वाले कुत्तों के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें भोजन, पानी, नियमित मेडिकल जांच और बिहेवियर थेरेपी (व्यवहार सुधार) की व्यवस्था होगी। हालांकि, आक्रामक पाए गए डॉग्स को अस्थायी रूप से घूमने-फिरने की आज़ादी नहीं होगी। उन्हें तब तक वहीं रखा जाएगा जब तक उनका व्यवहार सामान्य नहीं हो जाता। नगर निगम ने बताया कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और बोर्ड मीटिंग से मिली अनुमति के बाद लिया गया है।

इस कदम से दो तरह का असर देखने को मिल सकता है। एक ओर, इससे इंसानों और कुत्तों के बीच होने वाले टकरावों में कमी आ सकती है, जबकि दूसरी ओर, आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण में लाने और पालतू कुत्तों के पंजीकरण की दिशा में भी प्रगति होगी। हालांकि, चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। देहरादून में अब तक लगभग 66 प्रतिशत स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी और वैक्सीनेशन हो चुका है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में कुत्ते इस प्रक्रिया से बाहर हैं।

लेखक के बारे में
Follow Us :GoogleNews