गोल्डन फॉरेस्ट जमीन घोटाला, अदालत ने राजपुर पुलिस को मुकदमा दर्ज कर जांच के आदेश दिए

देहरादून के सहस्रधारा रोड स्थित धनौला गांव में सुप्रीम कोर्ट से प्रतिबंधित गोल्डन फॉरेस्ट और सरकारी भूमि की अवैध बिक्री के मामले ने तूल पकड़ लिया है। स मामले में शिकायतकर्ता शाकुल उनियाल ने महानिरीक्षक निबंधन और पुलिस पर कार्रवाई में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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Ashok Nagar RAPE

देहरादून के सहस्रधारा रोड स्थित धनौला गांव में सुप्रीम कोर्ट से प्रतिबंधित गोल्डन फॉरेस्ट और सरकारी भूमि की अवैध बिक्री के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अदालत ने शुक्रवार को राजपुर पुलिस को तत्काल मुकदमा दर्ज कर गहन विवेचना करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में शिकायतकर्ता शाकुल उनियाल ने महानिरीक्षक निबंधन और पुलिस पर कार्रवाई में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

गोल्डन फॉरेस्ट जमीन घोटाला

शिकायतकर्ता ने अदालत को बताया कि धनौला गांव में कूटरचित दस्तावेजों के जरिये आम लोगों को गोल्डन फॉरेस्ट और नदी की भूमि बेची जा रही है। इस संबंध में उन्होंने पहली बार एक फरवरी 2021 को जिलाधिकारी और आयुक्त गढ़वाल को शिकायत दी थी। इसके बाद 15 दिसंबर को उप जिलाधिकारी (सदर) को भी शिकायत दी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसी बीच एक अन्य व्यक्ति की शिकायत पर प्रशासन ने एसआईटी (भूमि) से जांच कराई।

एसआईटी ने जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि करते हुए 12 अप्रैल 2024 को तत्कालीन महानिरीक्षक निबंधन संदीप श्रीवास्तव को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। इसके बावजूद मामला तीन माह तक दबा रहा। बाद में दो जुलाई 2024 को आईजी निबंधन ने एसएसपी देहरादून को जांच की संस्तुति भेजी, लेकिन एफआईआर तब भी दर्ज नहीं हुई। उल्टे, शिकायतकर्ता शाकुल के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया। इस पर उन्होंने 27 अगस्त को फिर से शिकायत दी और बाद में अदालत में याचिका दाखिल की।

पुलिस ने जवाब दाखिल किया

अदालत के निर्देश पर पुलिस ने जवाब दाखिल किया, जिसमें बताया गया कि एसआईटी ने आरोपी भरत सिंह नेगी, प्रशांत डोभाल, राजीव तलवार, मनोरमा डोभाल और नीरू तलवार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति की थी, लेकिन यह नहीं बताया गया कि उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, अपराध की जानकारी रखने वाला कोई भी व्यक्ति शिकायत दर्ज करा सकता है, केवल पीड़ित पक्ष ही नहीं।

तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट साहिस्ता बानों ने आदेश दिया कि संज्ञेय अपराध के तहत मामला दर्ज कर गहन विवेचना की जाए। इस पर एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि गोल्डन फॉरेस्ट की जमीन बिक्री से संबंधित कुछ मामलों में पहले ही जांच पूरी की जा चुकी है और फाइनल रिपोर्ट दाखिल हो चुकी है। अब अदालत के नए आदेशों के अनुसार गहन जांच की जाएगी।

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