उत्तराखंड में ‘महिलाओं’ और ‘किसानों’ का राज! पहली बार मिली ‘प्राथमिकता’, जानें क्या है नई गन्ना नीति का सीक्रेट!

उत्तराखंड में ‘महिलाओं’ और ‘किसानों’ का राज! पहली बार मिली ‘प्राथमिकता’, जानें क्या है नई गन्ना नीति का सीक्रेट!

अगर आप गन्ना किसान हैं तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है! गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने पेराई सत्र 2025-26 के लिए नई नीति जारी कर दी है। इस बार खास ध्यान महिलाओं और छोटे किसानों पर दिया गया है। अब उन्हें गन्ने की आपूर्ति में प्राथमिकता मिलेगी। इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि खेती में महिलाओं की भागीदारी भी मजबूत होगी।

महिलाओं को 20% प्राथमिकता

गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के आयुक्त त्रिलोक सिंह मर्तोलिया ने बताया कि इस बार महिला किसानों को गन्ना आपूर्ति में 20 प्रतिशत प्राथमिकता दी जाएगी। पेराई सत्र इसी नियम के आधार पर शुरू होगा। महिला किसान पहले चरण में ही अपनी गन्ने की फसल बेच सकेंगी। इससे महिलाओं को आर्थिक मदद मिलेगी और वे खेती में अधिक सक्रिय होकर आगे बढ़ सकेंगी।

छोटे किसानों को भी मिलेगा फायदा

इसके साथ ही छोटे किसानों को भी प्राथमिकता दी गई है। जिनके पास 99 क्विंटल तक गन्ना फसल है, उनकी पर्चियां एक और दो पखवाड़े में जारी होंगी। वहीं जिनके पास 100 से 144 क्विंटल तक गन्ना है, उनकी पर्चियां एक से तीन पखवाड़े में मिलेंगी। इससे छोटे किसानों को समय पर अपना गन्ना बेचने का मौका मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का ध्यान

आयुक्त ने कहा कि पिछले साल यानी 2023-24 में प्राकृतिक आपदा से गन्ने की फसल को काफी नुकसान हुआ था। इसे देखते हुए दो या तीन पेराई सत्र में हुई आपूर्ति के औसत के आधार पर बेसिक कोटा तय किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को राहत देना और उनकी फसल को सही समय पर खरीदना है, ताकि नुकसान की भरपाई हो सके।

समय पर पर्ची और भुगतान की व्यवस्था

गन्ना आपूर्ति नीति का मुख्य उद्देश्य किसानों को समय पर गन्ना बेचने की सुविधा देना और उनका भुगतान जल्द कराना है। इससे किसानों को परेशानी नहीं होगी और वे अपनी खेती पर ध्यान दे सकेंगे। नीति से गन्ना उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आमदनी में सुधार होगा। सरकार किसानों की मदद के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

किसानों की आय बढ़ाने की योजना

आयुक्त त्रिलोक सिंह मर्तोलिया ने कहा कि यह नीति गन्ना उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में इजाफा करने की दिशा में बड़ा कदम है। समय पर पर्ची मिलने से किसानों को आर्थिक सहयोग मिलेगा। वहीं महिलाओं को भी खेती में शामिल कर उनकी भूमिका बढ़ेगी। इससे खेती में बदलाव आएगा और ग्रामीण इलाकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

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