उत्तराखंड में 27 जनवरी को मनाया जाएगा UCC दिवस, मुख्यमंत्री धामी बोले- विवाह पंजीकरण हुआ आसान, निजता उल्लंघन की एक भी शिकायत नहीं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता के तहत बीते एक साल में विभिन्न सेवाओं के लिए कुल पांच लाख से अधिक आवेदन हुए हैं, लेकिन एक भी मामले में निजता उल्लंघन की शिकायत नहीं आई है।
Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami

उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू हुआ था। 27 जनवरी 2026 को राज्य में UCC लागू हुए पूरा एक साल हो जाएगा। इस मौके पर धामी सरकार राज्य में UCC दिवस मनाएगी और कई शहरों में कार्यक्रम आयोजित करेगी। इस बीच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीते एक साल में यूसीसी के माध्यम से जनता को हुए फायदे की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता के तहत बीते एक साल में विभिन्न सेवाओं के लिए कुल पांच लाख से अधिक आवेदन हुए हैं, लेकिन एक भी मामले में निजता उल्लंघन की शिकायत नहीं आई है। इस तरह उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता नागरिकों की निजी जानकारियां सुरक्षित रखने के अपने संकल्प पर शत प्रतिशत खरा उतरी है। यही नहीं, ऑनलाइन आवेदन में पूरी प्रक्रिया फेसलेस होने से किसी की भी पहचान सार्वजनिक होने का खतरा नहीं है।

मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि समान नागरिक संहिता को लेकर कुछ लोगों ने शुरुआत में नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया। विगत एक साल में यूसीसी क्रियान्वयन ने ऐसे सभी लोगों को जवाब दे दिया है। समान नागरिक संहिता नागरिकों की निजता का शत प्रतिशत पालन करने में सफल रही है। साथ ही पूरे प्रदेश में जितनी सरलता से इस प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है, वो अपने आप में गुड गर्वनेंस का उदाहरण है।

घर बैठे सेवाएं, सरकारी दफ्तरों के चक्कर से मिली राहत

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद इससे संबंधित लगभग शत प्रतिशत आवेदन यूसीसी पोर्टल के जरिए हो रहे हैं। इसमें आवेदक घर बैठे ही किसी भी सेवा के लिए आवेदन कर सकता है। इस तरह उन्हें किसी भी सरकारी कार्यालय या अधिकारी के सामने उपस्थित होने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही पोर्टल में नागरिकों की निजी जानकारी को सुरक्षित और गोपनीय रखने के लिए मजबूत सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं।

निजता उल्लंघन की एक भी शिकायत नहीं

उन्होंने आगे कहा कि ये व्यवस्था सुनिश्चित की गई है कि ऑनलाइन आवेदन यदि एक बार सक्षम स्तर के अधिकारी स्तर से मंजूर हो गया तो फिर, संबंधित अधिकारी भी आवेदक की निजी जानकारी नहीं देख पाता है। आवेदन के साथ प्रस्तुत की गई निजी जानकारी तक सिर्फ आवेदक की ही पहुंच है, जो जरूरी वैरिफिकेशन प्रक्रिया के जरिए इसे देख सकता है। यही कारण है कि बीते एक साल में निजता उल्लंघन की एक भी शिकायत नहीं आई है, जबकि अब लोग विवाह पंजीकरण के साथ ही विवाह विच्छेद, वसीयत पंजीकरण, लिव इन पंजीकरण से लेकर लिव इन रिश्ते समाप्त करने तक के लिए यूसीसी प्रावधानों का प्रयोग कर रहे हैं। दूसरी तरफ औसत पांच दिन में प्रमाणपत्र मिलने से लोगों का समय भी बच रहा है।

Shyam Dwivedi
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