
उत्तराखंड में नमक में रेत मिलने का विवाद शांत भी नहीं हुआ था कि अब महिलाओं से जुड़ी एक नई परेशानी सामने आई है। राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को सेनेटरी पैड बेचने के लिए बड़े-बड़े कट्टे थमा दिए, जिससे उनका पारा चढ़ गया। पहले से विवादों से जूझ रही आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां अब इस नई चुनौती को लेकर नाराज हैं और विभाग पर शोषण का आरोप लगा रही हैं।
राज्य में सरकारी दुकानों पर रेत मिला नमक पूरे प्रदेश में चर्चा में रहा। अब इस विवाद के बीच, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को सेनेटरी पैड बेचने के लिए जिम्मेदारी दी गई। प्रदेश अध्यक्ष रेखा नेगी ने बताया कि विभाग ने आज उन्हें कट्टे थमा दिए हैं और अब उन्हें इन पैडों को बेचना है। इससे आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों पहले सेनेटरी पैड का एक पैकेट छह रुपये में बेचा जाता था, जिसमें पांच रुपये विभाग में जमा करने होते थे और एक रुपये कार्यकत्रियों को मिलता था। अब यह कीमत बढ़ाकर 15 रुपये कर दी गई है। लोगों ने बढ़ी कीमत के कारण इसे खरीदने से इनकार कर दिया है। रेखा नेगी ने कहा कि सरकार को इसे निशुल्क उपलब्ध कराना चाहिए और कार्यकत्रियों पर बेचने का दबाव न डाला जाए।
कार्यकत्रियों का कहना है कि महिलाओं से जब वे पैड खरीदने के लिए कहते हैं तो उन्हें अक्सर बताया जाता है कि इनकी गुणवत्ता खराब है। यह बात महिलाओं और कार्यकत्रियों दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है। इसके साथ ही कार्यकत्रियों का कहना है कि विभाग की इस नीति से उनकी प्रतिष्ठा और विश्वास दोनों पर असर पड़ रहा है।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वे सेनेटरी पैड को मुफ्त में वितरित करें। इससे न केवल महिलाओं को फायदा होगा, बल्कि कार्यकत्रियों पर बेचने का दबाव भी खत्म होगा। उनका यह भी कहना है कि कीमत बढ़ाने और कार्यकत्रियों को जिम्मेदारी सौंपने से जनता का विश्वास और कार्यकत्रियों का मनोबल दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
