CM शिवराज का बड़ा फैसला, दुर्गा उत्सव की अनुमति, झांकी भी लगा सकेंगे

CM शिवराज का बड़ा फैसला, दुर्गा उत्सव की अनुमति, झांकी भी लगा सकेंगे

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| अनलॉक-4 (Unlock 4) में सभी प्रतिबंधों को हटाया जा रहा है| सन्डे लॉकडाउन और नाईट कर्फ्यू भी समाप्त कर दिया गया है| इस बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने बड़ा फैसला लिया है| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में सार्वजनिक रूप से दुर्गा उत्सव (Durga Utsav) मनाने की अनुमति रहेगी| नवरात्रि में पंडाल, झांकियां लगाई जा सकेंगी| हालांकि 100 से अधिक लोग इकट्ठे नहीं हो सकेंगे| वहीं दुर्गा प्रतिमा की ऊंचाई प्रशासन तय करेगा|

प्रदेश में कोरोना की स्थिति को लेकर समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह फैसला लिया है| चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि 21 सितम्बर के बाद सभी धार्मिक आयोजनों की अनुमति रहेगी| दुर्गा उत्सव में पंडाल, झांकिया लगाई जा सकेंगी| हालांकि इसमें 100 लोगों से अधिक की अनुमति नहीं होगी| वहीं प्रजापति समाज की लम्बे समय से मूर्तियों को लेकर मांग की जा रही थी| जिसके चलते फैसला लिया गया है कि नवरात्रि में सार्वजानिक प्रतिमा स्थापित की जा सकेंगी| लेकिन प्रतिमा की ऊँचाई प्रशासन द्वारा तय किया जाएगा|

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि लॉकडाउन-4 के प्रावधान अनुसार दुर्गा उत्सव आयोजन में अधिकतम एक सौ व्यक्तियों की उपस्थिति की स्वीकृति होगी, परंतु कोरोना से बचाव की सभी सावधानियों जैसे सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क तथा सेनेटाइजर का उपयोग अनिवार्यता: सुनिश्चित करना होगा। दुर्गा विसर्जन के संबंध में समयानुसार गाइड लाइन जारी की जाएगी।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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