सीएम डॉ मोहन यादव ने मूर्धन्य साहित्यकारों को दिया राष्ट्रीय हिंदी भाषा सम्मान, कहा- हिन्दी हमारी संस्कृति को जोड़ती है

कार्यक्रम के दौरान ही महाराजा विक्रमादित्‍य शोधपीठ द्वारा आयोजित विक्रमोत्‍सव 2025 को एशिया के शासकीय समारोह की विशेष श्रेणी में वॉव अवार्ड एशिया की टीम द्वारा मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव को सम्‍मान स्वरूप गोल्‍ड अवार्ड भेंट किया गया।
Mohan Yadav BPL

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आज रवींद्र भवन, भोपाल में आयोजित हिन्दी दिवस कार्यक्रम “भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान” में देश-विदेश में हिन्दी भाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली साहित्यकारों को अलंकृत कर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विभिन्न साहित्यकारों की विविध कृतियों का विमोचन भी किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा हिन्दी भाषा और साहित्य के गौरव को समर्पित यह आयोजन हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का सशक्त माध्यम है, उन्होंने कहा हिन्दी हमारी संस्कृति को जोड़ती है। हिन्दी के बिना हमारा साहित्य, हमारी भावनाएं और हमारी संवेदनाएं यकीनन अधूरी हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मां और मातृभाषा से ऊपर दूसरा कोई नहीं है। मां और मातृभाषा ही हमारी सबसे बड़ी पालक हैं। इनका स्थान कोई नहीं ले सकता है, जैसे मां के चरणों में चारधाम है, उसी प्रकार मातृभाषा की गोद में आनंदधाम है। जितना सटीक हमारी मातृभाषा का व्याकरण है, उतना ही समृद्ध हिन्दी साहित्य है। उन्होंने कहा कि 52 वर्णों में गुंथी हुई हिन्दी की वर्णमाला ही हमारी पहली पाठशाला है।

10 मूर्धन्य साहित्यकारों को राष्ट्रीय हिन्दी भाषा सम्मान

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में हिन्दी साहित्य लेखन और हिंदी के व्यापक स्तर पर लोकव्यापीकरण में योगदान देने वाले देश-विदेश के हिन्दी के 10 मूर्धन्य साहित्यकारों को विभिन्न राष्ट्रीय हिन्दी भाषा सम्मानों से सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न साहित्यिक पुस्तकों का विमोचन/लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में स्‍वदेशी जागरण अभियान अंतर्गत देश हित में द सूत्र का अभियान Be इंडियन, Buy इंडियन, हमारी-लक्ष्‍मी-हमारे पास का शुभारंभ किया गया। आरएनटीयू के विश्व हिंदी ओलंपियाड एवं विश्वरंग के पोस्टर का लोकार्पण भी इस अवसर पर किया गया।

आल्हा-ऊदल के महाकाव्य में हिंदी की सुंदरता

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने हजारों साल पहले मातृभाषा की गरिमा का उल्लेख किया था। आल्हा-ऊदल के महाकाव्य में हिंदी की सुंदरता देखने को मिलती है।  राजाभोज के काल में कविता के रचनाकारों को स्वर्ण मुद्राएं देकर सम्मानित किया जाता था। महाकवि कालिदास की रचनाओं से मालवी, भीली, कोरकू जैसी अनेक भाषाएं निकली हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदी काव्य रचनाओं को अलग स्थान दिलाया। वर्तमान में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी दुनिया के हर बड़े मंच पर हिंदी भाषा में संबोधन के जरिए भारत को गौरवान्वित करते हैं। उनके पहुंचने मात्र से ही मंच प्रकाशमय हो जाता है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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