सीधी पेशाब कांड पीड़ित आदिवासी के सीएम शिवराज ने पखारे पैर, कहा- “दशमत जी, मन दुखी हैं, मैं माफ़ी मांगता हूँ”

सीधी पेशाब कांड पीड़ित आदिवासी के सीएम शिवराज ने पखारे पैर, कहा- “दशमत जी, मन दुखी हैं, मैं माफ़ी मांगता हूँ”

Sidhi Urination case : भाजपा नेता द्वारा प्रताड़ित और अपमानित किये दशमत आदिवासी से सीएम शिवराज सिंह चौहान ने आज मुलाकात की, सीएम ने अपने भोपाल स्थित शासकीय आवास पर दशमत आदिवासी को बुलाया, उनके हालचाल पूछे, अपने हाथों से पैर धोये। सीएम ने ट्वीट कर लिखा – “मन दु:खी है; दशमत जी आपकी पीड़ा बाँटने का यह प्रयास है, आपसे माफी भी मांगता हूँ, मेरे लिए जनता ही भगवान है।

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पिछले दिनों वायरल हुए सीधी के एक वीडियो ने मध्य प्रदेश की शर्मसार कर दिया है, भाजपा नेता प्रवेश शुक्ला ने जो अपराध किया उसकी सजा उसे सरकार ने दे दी है, उसके खिलाफ NSA की कार्रवाई की गई है, पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और उसके घर पर बुलडोजर भी चला दिया गया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घटना के बाद तत्काल एक्शन लिया और पुलिस एवं प्रशासन को कड़ा एक्शन लेने के निर्देश दिए थे, आज उन्होंने पीड़ित दशमत आदिवासी को अपने भोपाल स्थित शासकीय आवास पर बुलाया, उनके पैर धोये, हालचाल जाने, परेशानियाँ पूछी और कहा कि कोई भी समस्या हो तो बताइए।

दशमत आदिवासी ने बताया कि वो पल्लेदारी करता है, मंडी में हाथ ठेला चलाता है उससे परिवार चलाता है, सीएम ने जब बच्चों की पढ़ाई के बारे में पूछा तो उसने कहा कि पढ़ते हैं और उन्हें वजीफा भी मिलता है, मुख्यमंत्री ने कहा कोई भी परेशानी हो तो बताओ इसपर ईमानदार और स्वाभिमानी दशमत ने कुछ नहीं कहा, सीएम ने उसका शाल, श्रीफल और पुष्प गुच्छ से सम्मान किया और उसे नाश्ता कराया, गणेश जी की प्रतिमा भेंट की।

सीएम शिवराज ने मुलाकात का वीडियो अपने ट्विटर एकाउंट पर शेयर भी किया हैं, उन्होंने दो ट्वीट किये , पहले ट्वीट में सीएम ने लिखा – मन दु:खी है दशमत जी, आपकी पीड़ा बाँटने का यह प्रयास है, आपसे माफी भी माँगता हूँ, मेरे लिए जनता ही भगवान है।

सीएम ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा – यह वीडियो मैं आपके साथ इसलिए साझा कर रहा हूँ कि सब समझ लें कि मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान है, तो जनता भगवान है। किसी के साथ भी अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। राज्य के हर नागरिक का सम्मान मेरा सम्मान है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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