छोटी सी उम्र में बड़ा सन्देश दे रही ‘तनीषा’, पीरियड्स के प्रति फैला रहीं जागरूकता

छोटी सी उम्र में बड़ा सन्देश दे रही ‘तनीषा’, पीरियड्स के प्रति फैला रहीं जागरूकता

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट
ज्यादातर महिलाएं मासिक धर्म या पीरियड्स को लेकर खुलकर बात नहीं करतीं और न ही इस दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति जागरूक होती हैं। मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई और स्वच्छता को लेकर खासतौर से सतर्क रहने की जरूरत है| पीरियड्स यानि माहवारी एक ऐसी प्रक्रिया है जोकि प्राकृतिक है, माहवारी के दौरान की गयी छोटी-छोटी लापरवाही अक्सर महिलाओं के लिए ज़िंदगी भर की बीमारी बन जाती है| ‘तनीषा पंडित’ जो महज 18 वर्ष की है, जो मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में समाज को शिक्षित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही हैं।

छोटी सी उम्र में तनीषा पंडित समाज को एक बड़ा सन्देश दे रही हैं| तनीषा रित्वा फाउंडेशन की फाउंडर है| इस फाउंडेशन में उनके साथ देश भर के 11000 स्टूडेंट्स भी काम कर रहे हैं| उन्होंने अनप्लास्टिक और आत्मनिर्भर मेंस्ट्रुएशन का अभियान चलाया है| जिसके अंतर्गत वह लोगों तक खुलकर बात करने, रेगुलर डिस्पोजेबल पैड इस्तेमाल ना करने जो कि हमारे पर्यावरण तथा हमारी सेहत के लिए हानिकारक है| जो इंडियन ब्रांड ऑर्गेनिक या फिर एनवायरमेंट फ्रेंडली बनाते हैं| फाउंडेशन के सदस्य उनको उपयोग करने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। लोगों के बीच अवेयरनेस फैला रहे हैं।

कोरोना काल में जरूरतमंदों की सेवा
भोपाल की रहने वाली तनीषा किरोड़ी मल कॉलेज दिल्ली यूनिवर्सिटी में BA प्रोग्राम 1st ईयर की छात्र हैं| कोरोना संकट काल में लॉकडाउन के समय भी तनीषा पंडित ने अपने साथियों के साथ जरूरतमंदों की मदद की और आगे भी उनका अभियान जारी है| इसके साथ ही बिहार में आई बाढ़ के लिए भी उन्होंने फण्ड इकठ्ठा किया, ताकि वह वहां के लोगों तक भी उनके उपयोग का सामान पहुंचा पाए।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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