कमिश्नर बदल रही भोपाल के इस बदहाल अस्पताल की सूरत

कमिश्नर बदल रही भोपाल के इस बदहाल अस्पताल की सूरत

भोपाल। एक समय भोपाल के सबसे बदहाल और अव्यवस्थाओं के लिए बदनाम माने जाने वाला सुल्तानिया जनाना अस्पताल अब एक नया रूप लेता जा रहा है । भोपाल की संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में अब अस्पताल की सूरत बदली बदली नजर आती है ।पिछले 6 माह से अस्पताल में पदस्थ हुए अधीक्षक डॉक्टर आईडी चौरसिया के नेतृत्व में अब हर वार्ड में साफ-सफाई का आलम यह है कि किसी प्राइवेट अस्पताल जैसा अस्पताल नजर आता है। अस्पताल के हाल को देखकर अब स्वयंसेवी संस्थाएं भी आगे आई हैं ।श्री मां मार्केटिंग प्राइवेट कंपनी के द्वारा इस अस्पताल को सात व्हीलचेयर दी गई है और आने वाले समय में सात स्ट्रेचर देने का भी वादा किया है ।संभागायुक्त के मार्गदर्शन में डॉक्टर आईडी चौरसिया ने अस्पताल में एक कैंटीन की भी व्यवस्था की है जो सोमवार से शुरू होगी और जिसमें अस्पताल के सारे स्टाफ सहित मरीजों के अटेंडरों के लिए भी हाइजीन नाश्ते की व्यवस्था हो सकेगी। अस्पताल की इस सूरत को देखकर स्थानीय मंत्री आरिफ अकील भी बेहद खुश हैं और उन्होंने सरकार से इस अस्पताल के लिए बजट की किसी भी तरह की कमी ना होने का भरोसा दिलाया है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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