सरकार, बस भेज देते तो आज हवाई जहाज भेजने की नौबत ना आती

SHIVRAJ SINGH

भोपाल।

महाराष्ट्र(maharastra) के औरंगाबाद(orangabaad) के पास हुए रेल हादसे (rail accident )में मध्य प्रदेश(madhypradesh) के 18 मजदूरों की मौत की हृदय विदारक घटना ने पूरे देश को हिला दिया है ।जालना की फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर मध्यप्रदेश(mp) के शहडोल(shahdol), उमरिया(umariya) और कटनी() जिले के रहने वाले थे और घर वापसी की आस में पैदल रेल पटरी के किनारे किनारे चल पड़े ।थके तो पटरी को सिराहना बना लिया ,यह जाने बिना कि सोएंगे तो फिर कभी नहीं उठेंगे।सरकार(shivraj sarkar) ने शोक व्यक्त किया और मुआवजे की घोषणा भी की ।वैसे ही जैसे हर घटना पर होती है और सरकार के लिए यह एक सामान्य बात है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में वास्तविक दोषी कौन है ,इसकी पड़ताल जरूरी है।

दरअसल मजदूरों के एक राज्य से दूसरे राज्य जाने के लिए हर राज्य में एक समिति का गठन किया गया और वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को इसका प्रभारी बनाया गया है महाराष्ट्र की प्रभारी मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी है जिनको इस बात की जिम्मेदारी निभानी थी कि वे महाराष्ट्र सरकार से समन्वय स्थापित कर इन मजदूरों की वापसी की समुचित व्यवस्था करती। इसके साथ ही शहडोल, उमरिया और कटनी जिले के कलेक्टर पर जिम्मेदारी थी कि वे औरंगाबाद के जिला कलेक्टर से बातचीत करके इन मजदूरों की वापसी किस माध्यम से होगी यह सुनिश्चित करते। लेकिन दुर्भाग्य ऐसा नहीं हुआ ।अब सरकार ने मंत्री मीना सिंह के नेतृत्व में राजकीय विमान को औरंगाबाद भेजा है। सरकार यदि कुछ बसे ही समय पर भेज देती तो शायद आज विमान भेजने की जरूरत न पड़ती।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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