अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस: सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया नशामुक्त समाज के निर्माण का आह्वान, जानिए इस दिन का इतिहास और महत्व

नशा सिर्फ एक व्यक्ति की बुरी आदत नहीं बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए भी गंभीर चुनौती है। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के साथ शिक्षा, रोजगार, पारिवारिक जीवन और सामाजिक व्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। ये दिन लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक होकर नशामुक्त जीवन अपनाने का संदेश देता है।
International Day Against Drug Abuse

International Day Against Drug Abuse

आज अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस है। हर साल ये दिन समाज को नशीले पदार्थों के नुकसान और अवैध तस्करी के खिलाफ जागरूक करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों, विशेषकर युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराना, नशे की रोकथाम के लिए जनजागरूकता बढ़ाना और नशामुक्त, स्वस्थ और सुरक्षित समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना है।

आज के दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान में सहभागी बनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस हमें नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है। सीएम ने आह्वान किया है कि हर नागरिक नशामुक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दे और स्वस्थ, सुरक्षित एवं सशक्त देश के संकल्प को साकार करने में अपनी भागीदारी निभाए।

अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस का इतिहास

अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 1987 में पारित एक प्रस्ताव के बाद हुई थी। इसके बाद से प्रत्येक वर्ष 26 जून को दुनिया भर में यह दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मादक पदार्थों के सेवन और उनकी अवैध तस्करी के विरुद्ध वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना, सरकारों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों को एकजुट करना तथा नशे से प्रभावित लोगों के उपचार और पुनर्वास को बढ़ावा देना है।

इस दिन का उद्देश्य और महत्व

विशेषज्ञों के अनुसार नशा सिर्फ व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं.. बल्कि उसके परिवार, समाज और देश की प्रगति को भी प्रभावित करता है। मादक पदार्थों का सेवन हृदय, यकृत, फेफड़ों और मस्तिष्क पर गंभीर दुष्प्रभाव डाल सकता है। इसके कारण अवसाद, मानसिक तनाव, चिंता, हिंसक व्यवहार, नैराश्य और आत्मघाती प्रवृत्तियों का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही शिक्षा, रोजगार और करियर प्रभावित होते हैं, पारिवारिक रिश्तों में तनाव पैदा होता है, आर्थिक स्थिति कमजोर होती है और अपराध व सड़क दुर्घटनाओं जैसी सामाजिक समस्याओं में भी बढ़ोत्तरी हो सकती है।

अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस का मूल संदेश यही है कि जागरूकता, शिक्षा, परिवार के सहयोग, प्रभावी कानून और समय पर उपचार के माध्यम से ही नशे की बढ़ती चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है। समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी से ही नशामुक्त, स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सकता है। ये दिन सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को नशे के खिलाफ संगठित करने का एक वैश्विक अभियान है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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