कमलनाथ ने उज्जैन-ओंकारेश्वर मार्ग की दुर्दशा पर सरकार को घेरा, कहा “श्रद्धालुओं के लिए आस्था नहीं, धैर्य और सहनशक्ति की यात्रा”

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां निर्माण कार्य अव्यवस्थित है, वैकल्पिक मार्ग अधूरे हैं और ट्रैफिक प्रबंधन पूरी तरह भगवान भरोसे चल रहा है। उन्होंने कहा कि यह लापरवाही नहीं बल्कि एक असफल प्रणाली का सबूत है। इसी के साथ उन्होंने मांग की कि सड़क बनने का इंतजार करने की बजाय सरकार तत्काल कदम उठाए और कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
Madhya Pradesh Farmers

Kamal Nath

कमलनाथ ने उज्जैन और ओंकारेश्वर को जोड़ने वाली 140 किलोमीटर सड़क की बदहाल स्थिति पर प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि दो पवित्र ज्योतिर्लिंगों के बीच की यह यात्रा आज श्रद्धालुओं के लिए आस्था नहीं बल्कि धैर्य और सहनशक्ति की परीक्षा बन गई है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन घंटे में पूरी होने वाली दूरी अब सात-सात घंटे ले रही है और इसका कारण कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही और कुप्रबंधन है। उन्होंने कहा कि पूरे मार्ग में जगह-जगह गड्ढे हैं, सड़कें खुदी पड़ी हैं और वैकल्पिक रास्तों की कोई सुव्यवस्थित व्यवस्था नहीं है। जाम वाली जगहों पर न बैरिकेडिंग है, न पुलिस की तैनाती और न ही ओवरटेकिंग रोकने की कोई निगरानी है।

कमलनाथ ने सड़क की जर्जर हालत पर सरकार को घेरा

कमलनाथ ने ज्जैन और ओंकारेश्वर दो महत्वपूर्ण ज्योतिर्लिंगों के बीच सड़क की जर्जर हालत पर प्रदेश की बीजेपी सरकार से सवाल किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के विकास के दावों और जमीनी स्थिति के बीच का यह विरोधाभास बेहद चुभने वाला है। पूर्व सीएम ने कहा कि लाखों श्रद्धालु महाकाल और ओंकारेश्वर के दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन उनके लिए यह यात्रा अब कष्ट और खतरे का पर्याय बन गई है। जब इतना लंबा निर्माण कार्य चल रहा है तो प्रशासन का पहला कर्तव्य बनता है कि सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग तैयार हों, जाम संभावित जगहों पर पहले से तैयारी हो और ट्रैफिक प्रबंधन चुस्त हो, मगर यहां सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह लापरवाही नहीं, एक असफल प्रणाली की साफ झलक है।

सरकार से की ये मांग 

पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से मांग की है कि सड़क बनने का इंतजार करने के बजाय तत्काल कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि “निर्माण अवधि तक सुरक्षित और सुगम वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराए जाएं, जाम वाले स्थानों को चिन्हित कर वहां पुलिस की नियमित तैनाती की जाए और ओवरटेकिंग रोकने के लिए सख्त मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी हो। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को निर्माण एजेंसियों की मर्जी और हालात पर छोड़ देना किसी भी जिम्मेदार सरकार का व्यवहार नहीं हो सकता।” कमलनाथ ने कहा कि  यह स्थिति कितने समय तक चलेगी, इसका कोई स्पष्ट रोडमैप सरकार के पास नहीं दिख रहा। लेकिन प्रशासन अब भी नहीं जागा तो जनता इस लापरवाही को याद रखेगी और हर मंच पर जवाब भी मांगेगी।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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